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एनजीटी के आदेश के बाद नसैनी में केन पर अवैध पुल ढहाया

Fri, 20 Feb 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तेवर असर दिखाने लगे हैं। हाल ही में दिए गए एनजीटी के आदेश के बाद केन नदी में नसैनी गांव में बना अवैध पुल खनिज और प्रशासन के अफसरों ने रातोंरात मशीनों से ध्वस्त कर दिया।
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इसके अलावा कई अन्य खदानों का भी निरीक्षण किया। अवैध खनन के खिलाफ एनजीटी ने याचिका पर सुनवाई चल रही है। 11 फरवरी को एनजीटी बेंच ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों को आदेश दिया था कि नदी में लगाए गए सभी अवरोध तत्काल हटाकर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल करें।

‘अमर उजाला’ ने 13 फरवरी को एनजीटी का यह आदेश प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके अलावा हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अवैध खनन के बारे में दिए गए सख्त आदेशों की खबर 19 फरवरी को प्रकाशित की थी।
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इसी रात (बृहस्पतिवार) को नरैनी एसडीएम सुधीर कुमार, खनिज अधिकारी हवलदार सिंह यादव और पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार नसैनी गांव पहुंचे और केन नदी पर बना पुल पोकलैंड मशीन से ध्वस्त करा दिया। यहां के बाद इन अफसरों ने बरसड़ा और मानपुर गांवों मेें केन नदी बालू घाटों का भी निरीक्षण किया। ग्रामीणों से बातचीत की।

बिल्हरका गांव में केन नदी घाट पर भारी मात्रा में बालू चोरी की जा चुकी है। हालांकि अफसरों के पहुंचने से पहले ही अवैध खनन करने वाले और ट्रक, ट्रैक्टर इत्यादि भाग निकले। खनिज अधिकारी का कहना है कि अवैध खनन करने वालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।

गौरतलब है कि एनजीटी और इलाहाबाद हाईकोर्ट दोनों ने ही अवैध खनन का गंभीरता से संज्ञान लिया है। एनजीटी के आदेश पर खनिज विभाग ने बांदा जनपद के 710 बालू कारोबारियों और अवैध खनन करने वालों को एनजीटी मेें पेश होने की नोटिस जारी की है। इस माले में एनजीटी में 9 मार्च को सुनवाई होनी है।

एनजीटी के आदेश पर इन सभी को फिर नोटिस जारी की जाएंगी। उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका में आदेश दिया है कि बालू खदानों और खनन निकासी वाले रास्तों पर सीसी टीवी कैमरे लगाए जाएं।

खनिज अधिकारी हफ्ते में और डीएम महीने में एक बार जरूर खदानों को निरीक्षण करें और रिपोर्ट भेजें। हाईकोर्ट के इस आदेश की खबर भी 19 फरवरी को सिर्फ ‘अमर उजाला’ ने प्रकाशित की थी।

आगे नहीं बढ़ीं बालू टेंडर की फाइलें
बांदा। जिस बात की आशंका शुरू में ही ‘अमर उजाला’ ने जताई थी वह सच साबित होती नजर आ रही है। बांदा जनपद की 15 बालू खदानों की नीलामी के टेंडर खुल जाने के 20 दिनों बाद भी उन्हें स्वीकृति नहीं दी गई।

खनिज विभाग और प्रशासन टेंडर पत्रावली शासन को न भेजकर दाबे बैठा है। कहा जा रहा है कि सरकार में रसूख रखने वालों को पट्टा न मिलने से कोई ‘खेल’ की तैयारी है। कोर्ट से स्टे भी लाया जा सकता है।

केन, यमुना और बागै नदियों की 15 बालू खदानों के लिए खनिज विभाग ने जनवरी माह में टेंडर आमंत्रित किए थे। 30 जनवरी को यह टेंडर डीएम कक्ष में टेंडरदाताओं के सामने खोले गए। टेंडर डालने वालों में प्रदेश के खनिज मंत्री के गृह जनपद अमेठी से आए कुछ उनके स्वजातीय लोग भी थे। इन्हें मंत्री का नजदीकी बताया जा रहा था।

इसके अलावा दिल्ली की दो कंपनियों ने भी टेंडर डाले थे, लेकिन बांदा के पुराने बालू कारोबारियों ने सबसे ऊंची दरों के टेंडर डाल कर रसूख वालों को रुसवा कर दिया। बांदा के लोगों ने 22 गुना ज्यादा में टेंडर डाले।

टेंडर खुलने की प्रक्रिया पूरी हुए करीब 20 दिन बीत गए हैं, लेकिन टेंडरों की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही। यह खनिज विभाग में ही दबी हुई है। ‘अमर उजाला’ ने 9 फरवरी को ही आशंका जताई थी कि टेंडर में मात खाए रसूख वाले शासन स्तर पर कुछ ‘खेल’ अपने हक में खेल सकते हैं।

टेंडर फाइल डीएम द्वारा शासन को न भेजे जाने पर यह कयास लगाया जा रहा है कि रसूख वालों ने कुछ अड़ंगेबाजी की है। हालांकि अपर जिला मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी खनिज डीएस पांडेय का कहना है कि फाइलें शासन को न भेजने की वजह नहीं बताई जा सकती। यह गोपनीय बात है।

उधर, जिला खनिज अधिकारी हवलदार सिंह यादव ने बताया कि टेंडरदाताओं की लिस्ट बन गई है। वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पेश होने दिल्ली चले गए थे इसीलिए फाइलें शासन को नहीं भेजी जा सकीं। एक-दो दिन में भेज दी जाएंगी।
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