बांदा। पुलिस मुठभेड़ मामले में साक्ष्य देने नहीं आ
रहे पुलिस के दो इंस्पेक्टरों के विरुद्ध अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी
किया है। एक इंस्पेक्टर के वेतन पर रोक लगा दी है। वह महोबा में तैनात हैं।
पुलिस मुठभेड़ का यह मामला 21 नवंबर 2013 का बताया गया है। धारा
307 व 12डीए एक्ट के मामले में वादी इंस्पेक्टर विवेकानंद तिवारी हैं।
उन्हें साक्ष्य पेश करने के लिए अदालत से सम्मन भी जारी हो चुका है। लेकिन
वह पेश नहीं हुए।
30 सितंबर 2014 को अदालत ने उनके विरुद्ध वारंट और 10 हजार रुपये जमा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी अदालत में हाजिर नहीं हुए।
शनिवार
को विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) नरेंद्र कुमार झा ने
इंस्पेक्टर के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस महानिरीक्षक
इलाहाबाद को आदेश दिया है कि आठ फरवरी को इंस्पेक्टर को अनिवार्य रूप से
अदालत में उपस्थित कराएं। विवेकानंद इस समय डीआईजी, इलाहबाद कार्यालय में
तैनात हैं।
इसी तरह महोबा कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर अब्दुल
रज्जाक धारा 307 के मामले मेें साक्ष्य देने अदालत नहीं आ रहे हैं। वह इस
मुकदमे के वादी हैं।
आरोपी लाल उर्फ सुल्तान जेल मेें है। साक्ष्य न
दिए जाने से मामला एक साल से लंबित है। इस दौरान उपरोक्त इंस्पेक्टर को कई
सम्मन जारी किए जा चुके हैं।
शनिवार को विशेष न्यायाधीश (दस्यु
प्रभावित क्षेत्र) ने इंस्पेक्टर के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने के
साथ ही महोबा पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि वे 11 फरवरी 2016 को
इंस्पेक्टर को अदालत में उपस्थित कराना सुनिश्चित करें।
साथ ही महोबा
कोषाधिकारी को आदेश दिया है कि अग्रिम आदेशों तक इंस्पेक्टर अब्दुल रज्जाक
का वेतन न दिया जाए।