बांदा। मारपीट और डकैती के मामले में नामजद सपा विधायक समेत नौ आरोपियों की अदालत ने हाजिरी माफी की अर्जी खारिज कर दी। उन सभी के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि इन सभी को 24 जून को अदालत में पेश करना सुनिश्चित कराएं। ताकि आरोप तय हो सकें।
चिल्ला थाना क्षेत्र के दतरौली गांव में 20 दिसंबर 2009 की रात नौ बजे पिंटू उर्फ हेमंत को पकड़ने के लिए पुलिस ने उसके मौसिया रामऔतार के घर में दबिश डाली। मुखबिरी के शक पर तेज बहादुर यादव के घर पर पिंटू ने अपने सहयोगियों के साथ हमलाकर दरवाजा तोड़कर मारपीट की। यह सभी लाठी, डंडा और असलहों से लैस थे। तेज बहादुर यादव घायल हो गया था। उसने अपने बहनोई और अधिवक्ता द्वारकेश यादव मंडेला को सूचना देकर गांव बुलवा लिया। 20 दिसंबर को सुबह श्री मंडेला दतरौली आ गए। वह घटना के बारे में जानकारी ले रहे थे तभी उन पर भी हमला हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लाइसेंसी रायफल और 3500 रुपये और सोने की जंजीर भी छीन ली गई। मंडेला की अर्जी पर अदालत ने रिपोर्ट के आदेश दिए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मंडेला ने अदालत से फरियाद की कि इस मामले की विवेचना किसी अन्य थाने से कराई जाए लेकिन अदालत नेे इसे परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए। घटना के लगभग सात वर्षों बाद भी अब तक इस मामले के आरोप तय नहीं हो पाए हैं। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश हरिनाथ पांडेय के समक्ष अभियुक्त विशंभर सिंह यादव (मौजूदा विधायक बबेरू), नथुवा, बलवीर, राजू, शिवशरण, राममूर्ति, सौखीलाल, घसीटा और किन्ना ने अर्जी दी कि अदालत मेें उनकी हाजिरी माफ कर दी जाए। न्यायाधीश ने इसे खारिज करते हुए इन सभी के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए।