केन और बागै नदियों में अवैध खनन के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित चल रहे यहां के सात लोगों के विरुद्ध एनजीटी ने जमानती वारंट जारी किया है। इन सभी को 10-10 हजार रुपये के जमानत बंधपत्र लेने के आदेश दिए गए हैं। वारंट की तामील पुलिस के जरिए होगी।
उदयपुर (निवासी) ब्रजमोहन यादव ने पिछले साल एनजीटी मेें याचिका दायर की थी। इसमें कहा है कि बांदा की केन और बागै नदियों में अवैध खनन हो रहा है। एनजीटी इसमें अपना कोर्ट कमिश्नर भेजकर मौका मुआयना करा चुकी है। इनमें दो दर्जन से ज्यादा लोगों के विरुद्ध सुनवाई चल रही है। बांदा और फतेहपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक एनजीटी में अपनी सफाई दाखिल कर चुके हैं।
एनजीटी में पेश न होने वाले सात लोगों के विरुद्ध एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए 10-10 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के न्यायाधीश/रजिस्ट्रार जनरल न्यायमूर्ति मुकेश कुमार गुप्ता ने काउंसलर अभिषेक यादव से कहा कि पुलिस महानिदेशक के माध्यम से जमानत बंधपत्र लें। इनमें मैनुद्दीन पुत्र कमरुद्दीन (कलहरा), राममिलन पुत्र रामसजीवन (शिवहारी), राकेश पुत्र रामसहाय (शिवहारी), शिवबरन पुत्र कुनाई (लमेहटा), नंद किशोर पुत्र रामेश्वर व छोटू पुत्र रामदास (तेंदुरा) और रज्जू पुत्र शिवबालक (शिवहारी) शामिल हैं। याचिकाकर्ता की पैरवी अधिवक्ता राहुल चौधरी कर रहे हैं।