राष्ट्रीय पक्षी मोर मारने में अभियुक्त को अदालत ने एक वर्ष की जेल व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह और जेल में रहना होगा। फैसला आने में करीब 15 साल लगे।
नरैनी कोतवाली क्षेत्र में तैनात वन दरोगा जुनैद अहमद ने 26 फरवरी 2003 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पड़मई गांव में बल्दू श्रीवास पुत्र सिधुवा ने मोर की हत्या कर दी। गांव के ही प्रभाकर पांडेय पुत्र विष्णुचरण पांडेय ने लिखित बयान देकर आरोपी के नाम का खुलासा किया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश की और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक अभियोजन अधिकारी रविकरन सिंह ने 7 गवाह पेश किए।
प्रथम अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु कुमार सिंह ने बुधवार को इस मामले का फैसला सुनाते हुए आरोपी बल्दू को धारा 9/51 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में एक वर्ष की जेल व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। उधर, गिरवां थाना क्षेत्र के बहोरवा पुरवा में 21 अगस्त 2013 को दो महिलाओं में हुई मारपीट मामले में बुधवार को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट रामकिशोर त्रिपाठी ने आरोपी महिला सावित्री को धारा 323 आईपीसी में एक वर्ष परिवीक्षा अवधि में रहने की सजा सुनाई।