नाबालिग लड़की को अपहृत कर उसके साथ बलात्कार के जुर्म में आरोपी को अदालत ने 10 वर्ष की सश्रम कैद और 6000 रुपये जुर्माने की सजा दी है। अन्य धाराओं में भी जेल और जुर्माना किया गया है।
नरैनी कोतवाली क्षेत्र के हजारी पुरवा (स्योढ़ा) निवासी गुलाब बक्श ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी 16 मार्च 2013 को दिन में करीब दो बजे उसकी पुत्री को बाबू खां उर्फ रफीक पुत्र मंगल (निवासी ग्राम अहार, बबेरू) बहला-फुसलाकर भगा ले किया। पुत्री घर से नकदी और जेवर भी ले गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुराचार, छेड़छाड़ सहित लैंगिक अपराध आदि की रिपोर्ट दर्ज की।
विवेचना के बाद अभियुक्त के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवभूषण वर्मा और शिवपूजन सिंह पटेल ने सात गवाह पेश किए।
सोमवार को विशेष न्यायाधीश/अपर सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार मल्ल ने इस मुकदमें का फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त बाबू खां उर्फ रफीक को धारा 366 में 10 वर्ष की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा दी।
जुर्माना न देने पर तीन माह की और कैद होगी। धारा 363 में सात वर्ष की कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर दो माह की अतिरिक्त कैद होगी। धारा 376 (2) में 10 वर्ष की सश्रम कारावास और 6000 हजार रुपये जुर्माना किया।
जुर्माना की रकम अदा न करने पर पांच माह और जेल में बिताने होंगे। धारा 506 में दो वर्ष और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में 10 वर्ष की कैद और 6000 रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर पांच माह की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।