बांदा। चार साल पहले हत्या के मामले में अभियुक्त पिता-पुत्र को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 8 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। इसी मामले में नाबालिग आरोपी की पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया गया।
तिंदवारी थाना क्षेत्र के धौसड़ गांव निवासी शैलेंद्र सिंह ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 13 अगस्त 2012 को उसका पिता मदन गोपाल पटेल और ताऊ देव प्रसाद सिंह व ताऊ का लड़का अजय सिंह मवेशी चराने गए थे। एक मवेशी पड़ोसी राजबहादुर पटेल के खेत में चला गया।
इस पर राजबहादुर और उसके पुत्र उदय व तेज बहादुर ने ललकारा और राजबहादुर ने मदन गोपाल को गोली मार दी। सीने में गोली लगने से उसकी वहीं मौत हो गई। ताऊ देव प्रसाद सिंह बचाने पहुंचा तो उस पर भी फायर किया। गोली उसके हाथ में लगी। उदय व तेज बहादुर ने भी लाठियों से देव प्रसाद की पिटाई की। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विवेचना अधिकारी ने जांच के बाद राजबहादुर और उसके पुत्र उदय व तेज बहादुर के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। तेज बहादुर के नाबालिग होने से उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। उधर, विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) हरिनाथ पांडेय की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा व उमाशंकर पटेल ने सात गवाह पेश किए।
दोनों पक्षों की बहस व पत्रावली के साक्ष्य अवलोकन के बाद अदालत ने राजबहादुर पटेल और उसके पुत्र उदय पटेल को हत्या में आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। हत्या की कोशिश में सात साल की कैद व दो हजार रुपये जुर्माना और आर्म्स एक्ट में तीन साल की कैद व एक हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।