बांदा। मां के साथ शौच को गई युवती को सरेशाम बाइक पर
बैठाकर अपहरण करने और उसके साथ दुराचार करने के जुर्म में दो आरोपियों को
10-10 वर्ष की सश्रम कैद और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
तिंदवारा
थाना क्षेत्र के एक गांव के दलित ने जून 2010 को थाने में रिपोर्ट दर्ज
कराई थी कि शाम 7 बजे उसकी पुत्री मां के साथ शौच को गई थी। तभी सुखराम
प्रजापति पुत्र बुल्ला (वासिलपुर) और पप्पू पुत्र नौरंग यादव (सैमरी) और
राजवीर पुत्र रामकिशोर (सैमरी) तमंचे के बल पर उसकी पुत्री को जबरन बाइक पर
बैठाकर ले गए। उसे कानपुर में रखा।
छह दिन बाद वह पुत्री किसी तरह
उनके चंगुल से रिहा हुई। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज
दिया। अभी भी यह जेल में हैं। विवेचना के बाद पुलिस ने अदालत में धारा 363,
366, 504, 506 आईपीसी व एससीएसटी एक्ट अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी।
ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने 7 गवाह पेश किए।
सोमवार
को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) हरीनाथ पांडेय ने आरोपी राजवीर व
सुखराम को धारा 363 में तीन-तीन वर्ष कैद व तीन-तीन हजार रुपये जुर्माना,
धारा 376 (2) जी में 10-10 वर्ष की कैद और 5-5 हजार रुपये जुर्माना की सजा
सुनाई।
जुर्माना न देने पर क्रमश: एक व दो माह की अतिरिक्त कैद
भुगतनी होगी। धारा 366, 504 व 506 में बरी कर दिया। तीसरे आरोपी पप्पू को
सभी धाराओं से बरी कर दिया। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।