गांवों में स्वच्छ भारत मिशन चलाने के लिए स्वयं सेवी संगठन (एनजीओ) द्वारा भर्ती किए गए एक दर्जन से ज्यादा बेरोजगार युवक अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। भर्ती के नाम पर 50 हजार रुपये लेने और तीन माह में अब तक मानदेय के नाम पर धेला न देने से क्षुब्ध बेरोजगारों ने मंडलायुक्त और पुलिस को शिकायती तहरीर दी है।
शुक्रवार को मंडलायुक्त कार्यालय में सामूहिक हस्ताक्षरों से अपर आयुक्त को दिए ज्ञापन में बेरोजगार युवाओं ने कहा कि शहर में स्थित श्रीनाथ विहार कालोनी में चल रहे एनजीओ के ब्रांच मैनेजर और कौशांबी निवासी एक व्यक्ति ने उन सभी से 50-50 हजार रुपये लेकर अपने एनजीओ में भर्ती कर लिया। नियुक्ति पत्र भी दे दिया। 17 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का भरोसा दिलाया।
वह पिछले तीन महीने से स्वच्छ भारत मिशन के लिए गांवों में प्रचार और काम करते रहे। लेकिन तीन माह बीत गए उन्हें एनजीओ की तरफ से कोई पैसा नहीं मिला। बेरोजगारों ने बताया कि उन्होंने इसकी तहरीर पुलिस अधीक्षक और कोतवाली में दी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सीओ सिटी ने उन्हें सिविल लाइन चौकी प्रभारी के पास भेज दिया। चौकी प्रभारी ने एनजीओ के स्थानीय प्रभारी को चौकी बुलाया।
9 जुलाई को चौकी प्रभारी ने लिखित रूप से दिया कि वह कंपनी के जोनल हेड से फोन पर बात कर रहे हैं। 15-20 जुलाई तक युवकों का पैसा दे दिया जाएगा। बेरोजगारों ने बताया कि 20 जुलाई बीत गई। पैसा नहीं मिला और अब प्रभारी भी अपना फोन नहीं उठा रहे। बेरोजगारों के ज्ञापन पर अपर आयुक्त ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। इन युवकों में नत्थू, रामकिशुन, उदयवीर, दिनेश कुमार, अजय कुमार, आलोक कुमार, घनश्याम, कृष्णकांत तिवारी, रामचंद्र त्रिपाठी, कमल कुमार, रिषी बाबू, शानू, दिनेश कुमार और जितेंद्र कुमार आदि शामिल हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक मनोज द्विवेदी ने बताया कि युवकों को भर्ती करने वाली ऐसी कोई संस्था उनके विभाग/मिशन में नामित नहीं है। यह पूरी तरह फर्जी है। भर्ती और इस संस्था के बारे में उन्हें कोई जानकारी भी नहीं है। शिकायती पत्र मिलने पर इसकी जांच कराई जाएगी और धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।