बांदा। बुंदेलखंड में असलहा रखना ‘स्टेटस सिंबल’ माना जाता है। हर शस्त्रधारक ने खुद को खतरा बताते हुए आत्म सुरक्षा के लिए लाइसेंस लिया है लेकिन बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम मंडल में राम की तपो भूमि चित्रकूट में शस्त्रों को शौक सिर चढ़कर बोल रहा है। यहां हर 93 व्यक्ति के पास एक लाइसेंसी असलहा है। यह बुंदेलखंड के अन्य सभी जनपदों से ज्यादा है। ‘वीर भूमि’ कहे जाने वाले महोबा में सबसे कम शस्त्र लाइसेंस हैं।
शस्त्र लाइसेंस हासिल करना टेढ़ी खीर है। बिना सोर्स, सिफारिश या भर मुट्ठी पैसा खर्च किए लाइसेंस बनना नामुमकिन है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में 35,762 लाइसेंसी शस्त्र हैं। इससे चार गुना ज्यादा संख्या में लाइसेंसों के आवेदन पत्र थानों और तहसीलों से लेकर शस्त्र लिपिक के पटल तक लंबित हैं।
राजनीतिक दलों के रसूख वाले नेता और जनप्रतिनिधि अपने चहेतों और समर्थकों को अक्सर कोई सौगात देना चाहते हैं तो शस्त्र का लाइसेंस दिला देेते हैं। उधर, हैसियत न होने के बाद भी ‘आत्मरक्षा’ का हवाला देकर बड़ी संख्या में लोग जमीन जायदाद बेचकर महंगा शस्त्र खरीद लेते हैं।
चित्रकूट धर्म नगरी है। यहां रामचंद्र जी ने वनवास काटा था। पूरा चित्रकूट वनवास और धार्मिक स्थलों से भरा पड़ा है। बड़ी तादाद मेें साधु-संतों का यहां निवास है, लेकिन इसके बाद भी बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा शस्त्र लाइसेंसों का औसत यहीं हैं।
शस्त्र शौकीन इसके पीछे दस्यु प्रभावित क्षेत्र होने की दलील देते हैं। लाइसेंस हासिल करने वालों मेें तमाम ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें किसी ने आज तक थप्पड़ भी नहीं मारा, फिर भी वे अपनी जान का खतरा बताकर हथियार केे लाइसेंस लिए हैं।
चित्रकूट जनपद की आबादी 9,90,626 है। यहां मौजूदा समय में 10,562 शस्त्र लाइसेंस हैं। यानी हर 93वें व्यक्ति के पास लाइसेंसी शस्त्र है। यह औसत पूरे बुंदेलखंड का सबसे अधिक है। बांदा में 186 लोगों पर एक शस्त्र लाइसेंस है। महोबा में 146 और हमीरपुर में 115 लोगों के बीच एक शस्त्र लाइसेंस है। पूरे मंडल की आबादी 47,70,243 है। चारों जिलों में शस्त्रों की संख्या 35,762 है। यानी हर 125 व्यक्तियों पर एक लाइसेंसी शस्त्र है।