पीडब्ल्यूडी जेई को पिछले साल हुई हत्या में फर्जी फंसाने और अवैध धन उगाही करने पर अतर्रा के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत तीन लोगों के खिलाफ दलित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच क्षेत्राधिकारी अतर्रा को सौंपी गई है।
डीएम कालोनी (सिविल लाइन) निवासी रुक्मिणी वर्मा ने तहरीर में कहा है कि उसके पति पीडब्ल्यूडी (चित्रकूट) में जेई हैं। 22 अक्तूबर 2015 को जेठ के साले अनिल कबीर की हत्या हो गई थी। इसमें उसके पति को झूठा फंसा दिया गया था। घटना के समय वह शहर स्थित अपने आवास में थे।
रात में अतर्रा थाने की पुलिस उसके पति को जबरन उठा ले गई। पति को छुड़ाने के एवज में तत्कालीन थानाध्यक्ष राकेश पांडेय, मुंशी उग्रेश त्रिपाठी तथा कांस्टेबल दशरथ ने उनसे 10 लाख रुपये मांगे। उसने जेवर बेचकर और कर्ज लेकर 7.86 लाख रुपये की रकम पुलिस को दी। पुलिस ने मुंह खोलने पर दोबारा हत्या में फंसाने की धमकी दी।
उधर, फाइनल रिपोर्ट के आधार पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पति को निर्दोष पाते हुए पिछले साल 5 जनवरी को रिहा कर दिया। पुलिस की प्रताड़ना से पति सदमे में हैं। उसकी भी मानसिक व शरीरिक हालत खराब है। एसपी के निर्देश पर थानाध्यक्ष राकेश पांडेय, मुंशी उग्रेश त्रिपाठी और कांस्टेबल दशरथ के खिलाफ पुलिस ने दलित उत्पीड़न व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस क्षेत्राधिकारी, अतर्रा जितेंद्र सिंह परिहार को मामले की जांच सौंपी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही जांच पूरी कर पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट देंगे।