बांदा। बैंक कैश लूट की यह कोई पहली घटना नहीं है। हाल के सिर्फ डेढ़ सालों में ही कम से कम तीन ऐसी संगीन घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस किसी का भी संतोषजनक खुलासा नहीं कर पाई। खास बात यह है कि यह सारी लूटें इलाहाबाद बैंक और खासकर उसकी मुख्य ब्रांच से जुड़ी होती हैं। करीब डेढ़ साल पहले गूलरनाका स्थित बैंक मुख्यालय के पास जल संस्थान के रिटायर कर्मी को बाइक सवार लुटेरों ने गोली मारकर आठ लाख रुपये लूट लिए थे। गंभीर घायल जल संस्थान कर्मचारी का लंबा इलाज चला। इसके कुछ दिन बाद इसी वर्ष शहर के मध्य डीएवी इंटर कालेज परिसर स्थित सेंट्रल बैंक की ब्रांच से पैसा लेकर निकलते ही मदरसा दारुल उलूम रब्बानियां के कर्मचारी को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर देने के बाद बाइक सवार लुटेरे पांच लाख रुपये ले उड़े थे। उसके बाद बंगालीपुरा में बड़े डाकघर के पास एक प्राइवेट कंपनी का पैसा लेकर स्टेट बैंक बाइक पर आ रहे दो कर्मियों को दिनदहाड़े करीब 11 बजे तमंचे की नोंक पर साढ़े 11 लाख रुपये लूट लिए थे।
फिल्मी स्टाइल पर की लूट
बांदा। शहर की व्यस्त सड़क पर साढ़े 10 बजे फिल्मी स्टाइल में बदमाशों ने लूट को अंजाम दिया। इसके बाद भी किसी को भनक नहीं लगी। दूसरी तरफ यह भी अजब बात है कि दिनदहाड़े व्यस्त सड़क पर बड़ी लूट अंजाम देने मेें किसी असलहे का इस्तेमाल नहीं किया गया। मात्र एक लात मारकर कैशियर की बाइक गिराकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से बैग छीन ले जाया गया। बाइक चला रहे कैशियर को कोई चोट नहीं आई। फिर भी उसने लुटेरों का बाइक से पीछा करने की जुर्रत नहीं जुटाई। पुलिस हर दृष्टिकोण से जांच कर रही है।
शक के दायरे में बैंककर्मी, मोबाइल कब्जे में
बांदा। पुलिस ने लूट के शिकार हुए कैशियर की तरफ से भले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ लूट (394 आईपीसी) की रिपोर्ट दर्ज कर ली है लेकिन बैंक के कर्मचारी शक के दायरे में हैं। पुलिस ने कैशियर और उसके साथ बाइक पर बैठे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए हैं। इन फोेन पर हुई कॉल की डिटेल खंगाली जा रही है। सीओ प्रभात कुमार और कोतवाली प्रभारी केपी सिंह ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजेश से सघन पूछताछ की। उसका डेमो (घटना का रिहर्सल) भी कराया। उसके मोबाइल फोन पर हुई कॉल का डिटेल निकाला जा रहा है। पुलिस को शक है कि इस बड़ी लूटकांड मेें घर का ही कोई भेदी शामिल है।
बाइक में कैश भेजने की बार-बार भूल
बांदा। एक नहीं बल्कि कई बड़ी लूट के बाद भी बैंक अधिकारी सबक नहीं ले रहे। हर बार बड़ी रकम बाइक पर बिना सुरक्षा गार्ड या पुलिस के लाने-ले जाने की गलती दोहराते चले जा रहे हैं। इस पर डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने भी नाराजगी व्यक्त की है। पूर्व में हुई लूट के बाद पुलिस ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया था कि बड़ा कैश चार पहिया वाहन में ले जाएं। पुलिस को पहले से सूचना दें। ताकि स्थानीय चौकी या कोतवाली से कैश के साथ पुलिस कर्मी भेजा जा सके। यह भी निर्देश दिया था कि कैश के साथ बैंक का सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी हों। बैंक के नियम भी कुछ ऐसे ही बताए गए हैं। इसके बाद भी बैंक अधिकारी लगातार भूल कर रहे हैं। डीआईजी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह एक बार फिर बैंक के उच्चाधिकारियों को आगाह कराएंगे कि ऐसी अंधेरगर्दी न करें।
पैसा लुट गया, खाताधारक बैरंग लौटे
बांदा। बैंक का पैसा लुटने के बाद खाता धारक बैंक में घंटों मायूस बैठे रहे। इस दौरान तमाम खाताधारक बिना पैसा निकाले ही बैरंग लौट गए। तिंदवारा गांव की ब्रांच में शनिवार को बैंक खुलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण खाताधारक आ गए थे। ज्यादातर को अपने खातों से पैसा निकालना था। कैशियर मुख्य ब्रांच से पैसा लाकर बांटते। लेकिन बैंक पहुंचने से पहले की कैश लुट गया। बैंक में अफरा-तफरी मच गई और सारे कामकाज ठप हो गए। खबर पाकर बैंक के एलडीएम भी घटना स्थल और तिंदवारा ब्रांच पहुुंचे। पूरे दिन बैंक का कामकाज बाधित रहा।