बांदा। प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या के मामले में 17 साल बाद सुनाए गए फैसले में अदालत ने सभी चार अभियुक्तों को दोष सिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना किया गया।
कोतवाली क्षेत्र के खुटला मोहल्ला निवासी दलित बच्चू पुत्र बाबूलाल ने 30 अक्तूबर 1998 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसके भाई मूलचंद्र उर्फ मुल्लू की भूरागढ़ निवासी राजाराम पुत्र बाबादीन से दोस्ती थी। राजाराम 28 अक्तूबर को रामचंद्र पुत्र नत्थू केवट, मुन्ना पुत्र छंगा केवट व नारायणदास पुत्र रामसुफल के साथ उसके घर आया और मूलचंद्र को साथ ले गया। चारों शराब के नशे में थे।
केन नदी ले जाकर मूलचंद्र की हत्या कर दी और रस्सी से बांध कर शव नदी में फेंक दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर शव नदी से बरामद किया। विवेचना अधिकारी ने चारों के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) हरिनाथ पांडेय की अदालत में सुनवाई के दौरान ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी ने सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश ने चारों को दोष सिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।