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छेड़छाड़ की गलत रिपोर्ट लिखाने में फंसे बाप-बेटी

Tue, 05 Jul 2016 11:37 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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अदालत का फैसला
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बांदा। शादी से इनकार करने पर गुस्से में आकर खानदानी युवक के विरुद्ध छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराना और बाद में मुकर जाना युवती को महंगा पड़ा। अदालत ने युवती और उसके पिता के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोपी युवक को बरी कर दिया है।
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गिरवां थाना क्षेत्र के बहोरवा पुरवा गांव की युवती ने अदालत में धारा 156 (3) के जरिये रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कमलदेव कुशवाहा का उसके घर आना-जाना था। कमलदेव ने उसके मां-बाप से कहा कि बैंक से सिलाई मशीन के लिए 20 हजार रुपये कर्ज दिला देगा। कमलदेव ने राजेश कुशवाहा नाम के व्यक्ति से मिलवाया और बताया कि यही बैंक से लोन कराते हैं।

10 मार्च 2013 को दोनों उसे बांदा कचहरी लाए और सादे कागजों में दस्तखत करा लिए। वह पढ़ी-लिखी नहीं है, सिर्फ दस्तखत बना पाती है। 31 मई 2013 को दोनों सुबह करीब 10 बजे उसके घर आए। उस समय उसके माता-पिता घर पर नहीं थे।
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कमलदेव ने पानी मंगाया। जैसे ही वह पानी लेने अंदर गई, पीछे से उसे पकड़ लिया और दोनों छेड़छाड़ करने लगे। शोर मचाने पर युवती के माता-पिता आ गए तो दोनों भाग निकले। सीजेएम ने अर्जी स्वीकार करते हुए रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। 13 जुलाई 2013 को रिपोर्ट दर्ज हो गई।

इस बीच अदालत में युवती ने सारा मामला पलट दिया। हलफनामा देकर कहा कि कमलदेव उसका रिश्तेदार है। राजेश भी उसके साथ घर आता-जाता था। राजेश कमलदेव का रिश्तेदार भी है। कमलदेव ने युवती की शादी राजेश से करने को कहा था लेकिन शादी नहीं की। इसी गुस्से में आकर उसने रिपोर्ट दर्ज करा दी। राजेश या कमलदेव ने उससे कोई अश्लील हरकत नहीं की। विवाद मात्र शादी का था।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले का फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश भूपेंद्र सहाय ने अभियुक्त कमलदेव कुशवाहा को धारा 376, 511, 506, 452 आईपीसी से बरी कर दिया। उनके जमानत बांड भी निरस्त कर दिए। अलबत्ता धारा 437क में 40 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड और इतनी ही राशि की दो जमानतें एक हफ्ते के अंदर प्रस्तुत करने के आदेश दिए।

सत्र न्यायाधीश ने बांदा पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि वह तथाकथित पीड़िता और उसके पिता के विरुद्ध झूठी एफआईआर दर्ज करने और झूठा शपथ पत्र देने के संबंध में दोनों पर एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करें। आरोपियों की पैरवी अधिवक्ता सत्यदेव अवस्थी ने की।
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