बांदा। चारा काटने खेत गई दलित महिला के साथ दुराचार
करने वाले को अदालत ने आठ वर्ष की सश्रम कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने
की सजा दी है। जुर्माना न देने पर तीन माह और जेल मेें रहना होगा।
घटना
खुरहंड पुलिस चौकी क्षेत्र के गांव की थी। पीड़ित महिला ने रिपोर्ट दर्ज
कराई थी कि वह 27 अगस्त 2001 को दिन में 11 बजे चारा काटने हार (जंगल) गई
थी। वहां उसे खुरहंड गांव के बलराम पुत्र पहलवान ने पकड़ लिया और दुराचार
किया। किसी से कहने पर जान से मारने की धमकी देकर चला गया।
पुलिस
ने धारा 376 और एससीएसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस
क्षेत्राधिकारी ने विवेचना के बाद अदालत ने चार्जशीट दाखिल की। ज्येष्ठ
अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर और सहायक शासकीय अधिवक्ता
फेरन पाल सिंह ने पांच गवाह पेश किए। इनमें दुराचार की शिकार हुई युवती भी
शामिल थी।
बुधवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) हरिनाथ
पांडेय ने इस मुकदमे का फैसला सुनाते हुए अभियुक्त बलराम को धारा 376
आईपीसी में आठ वर्ष की सश्रम जेल और पांच हजार रुपये जुर्माना तथा एससीएसटी
एक्ट में तीन वर्ष की कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
सभी
सजाएं एक साथ चलेंगी। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा है कि बलात्कार का
अपराध पीड़ित महिला को सिर्फ शारीरिक चोटें नहीं बल्कि उसकी पूरी चारित्रिक
पवित्रता भी नष्ट कर देता है।