बिसंडा (बांदा)। रंजिश के चलते दलित युवक की गोली
मारकर हत्या कर दी गई। शव गांव से कुछ दूर तालाब के पास पड़ा मिला। पुलिस
के देर से पहुंचने से नाराज परिजनों ने शव नहीं उठाने दिया।
बसपा
विधायक के समझाने पर मामला शांत हुआ। भाई की तहरीर पर पुलिस ने स्वजातीय
तीन सगे भाइयों समेत पांच के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है।
घटना
बिसंडा थाना क्षेत्र के पिस्टा गांव की है। राजकुमार (32) पुत्र सुखलाल
बुधवार को परिजनों के साथ पड़ोस के गांव में भैरव बाबा की पूजा अर्चना के
लिए गया था। वापस लौटने पर रात में चचेरे भाई कमलेश के घर खाना-पीना हुआ।
इसके बाद राजकुमार अपने घर की ओर चल दिया।
कमलेश उसे छोड़ने जा रहा
था, लेकिन कुछ दूर जाने पर राजकुमार ने उसे वापस कर दिया और अकेले निकल
गया। बृहस्पतिवार को सुबह करीब छह बजे उसका शव हीरा तालाब के किनारे पड़ा
मिला। चेहरे और सीने पर दो गोलियां लगी थीं। घटना की सूचना बिसंडा थाना
पुलिस को दी गई।
तीन घंटे बाद करीब नौ बजे पुलिस पहुंची तो परिजन
और ग्रामीण भड़क गए। लोगों ने शव उठाने से रोक दिया। बसपा विधायक जीसी
दिनकर, जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव वर्मा समेत कई बसपा नेता पहुंच गए।
विधायक के समझाने पर परिजन पुलिस को शव सौंपने के लिए राजी हुए।
पुलिस
ने आनन-फानन शव कपड़े में लपेट कर अपने वाहन में रखा और पोस्टमार्टम के
लिए भेज दिया। इस बीच आसपास के गांवों के भी बड़ी संख्या मेें ग्रामीण आ
गए। मृतक के भाई शिवकुमार की तहरीर पर गांव के तीन सगे भाई रामबहोरी,
रामदेव और राजू पुत्रगण कल्लू, शीतल पुत्र राजू व रामखिलावन उर्फ बच्चू
पुत्र भाऊ के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
थानाध्यक्ष
आरपी सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक आशुतोष कुमार शुक्ल व बबेरू क्षेत्राधिकारी ने भी
घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के परिजनों से जानकारी ली।
राजकुमार
और आरोपी पड़ोसी और स्वजातीय हैं। इनके बीच काफी दिनों से घर के पानी की
निकासी को लेकर विवाद चल रहा था। पिछले माह हुए विवाद में दोनों पक्षों के
बीच लाठियां चलने से कई लोग घायल हो गए थे। बिसंडा पुलिस ने दोनों पक्षों
का धारा 107/116 में चालान किया था। दोनों पक्षों ने अपनी जमानत कराई थी।
इसके 28वें दिन ही राजकुमार की हत्या हो गई।
मृतक राजकुमार की इस
घराने में तीसरी मौत है। पिछली दो हत्याओं में पुलिस ने कार्रवाई करने की
बजाय मामला रफा-दफा कर दिया था। दोनों पक्षों ने रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई
थी। चचेरे भाई आशाराम ने बताया कि एक साल पहले उनके खानदानी कामता प्रसाद
पुत्र राजकरन की हत्या कर दी गई थी।
20 साल पहले उसके चाचा जगरुप
की भी हत्या हुई थी। साल भर यह दूसरी हत्या है। मृतक के एक पुत्र और दो
पुत्रियां हैं। दूसरा पुत्र 15 दिन पहले पैदा हुआ है। नवजात शिशु को लिए
मृतक की पत्नी ममता बेसुध हो गई। मां रमकलिया का रो-रोकर बुरा हाल है।