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पांच लाख रुपये देकर डकैतों के चंगुल से छूटा किसान

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चित्रकूट।
डाकू बबुली कोल गैंग द्वारा अपहरण किया गया किसान शनिवार देर रात घर पहुंच गया है। स्वास्थ्य खराब होने से पुलिस क ी निगरानी में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों व ग्रामीणों का कहना है कि पांच लाख की फिरौती देने के बाद पकड़ छूटी है। वहीं पुलिस सर्चिंग अभियान में बनाए गए दबाव के चलते डाकू किसान को छोड़कर भाग गए थे।
 
तीन दिन पहले कुख्यात डाकू बबुली कोल गैंग ने मप्र, सेमरिया थाना क्षेत्र के गांव कटाई निवासी ललित सिंह पुत्र बृजराज सिंह सोलंकी का अपहरण कर लिया था। शनिवार देर रात को ललित सिंह घर पहुंचे तो परिजन व ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना न रहा। घर पहुंचते ही ललित अपने परिजनों के गले लग गए। जानकारी होते ही रीवा एसपी ललित शाक्यवार व अपर एसपी शिवकुमार थाना प्रभारी सुनील गुप्ता के साथ घर पहुुंचे। इसके बाद ललित से बातचीत की। स्वास्थ्य खराब होने पर उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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 इधर, किसान परिजनों व ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि पाठा क्षेत्र के जंगल में डाकू बबुली कोल गैंग को पांच लाख की फिरौती पहुंचाने के बाद पकड़ छूट पाई है । यह भी दावा किया कि डकैतों ने पचास लाख की मांग की थी लेकिन किसी तरह मध्यस्थता से पांच लाख में बात बनी थी। उधर, पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अपह्त किसान घर पहुंच गया है।

पुलिस टीम ने उसे सकुशल छुड़ाने के लिए लगातार कांबिंग की थी। इससे भयभीत डकैत उसे छोड़ जंगल में भाग गए थे। एसपी का कहना है कि धारकुंडी, देवगवां, मैनहा, करेड़ी, कुरेहटा, जदुवा व भगड़ के जंगल मेें डकैतों की तलाश की जारी है।
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इनसेट
रात को खिलाई रोटी सब्जी, दिन में आंख पर बांधी पट्टी
चित्रकूट।  डकैतों के चंगुल से छूटकर घर आए किसान ललित सिंह आज भी उस पल को याद कर कांप उठते हैं।  उन्होंने बताया कि डकैत बबुली कोल गैंग के ही सदस्य थे जो रात में बेहद कम बातचीत करते थे। लेकिन कुछ बात सुनी थी जिसमें सरगना का नाम सदस्य ले रहे थे। अपहरण के बाद जंगल के रास्ते एक अज्ञात पुरवा में गैंग के कुछ सदस्यों ने एक महिला को भी पकड़ा था और उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। हमेशा उसके साथ दो सदस्य असलहा लिए रहते थे और सिर्फ एक बार ही उनके ही फोन से बातचीत कराई थी। रात में खाने को रोटी सब्जी दी थी। दिन में आंख में पट्टी बांधकर जंगल में रखते थे। प्रौढ़ होने के कारण अक्सर वह थक जाते तो गैंग के सदस्य जबरन आगे बढ़वाते थे। अपहरण के दिनों में कई बार पुलिस की आसपास मौजूदगी की बात गैंग के सदस्य जरूर करते थे। पुलिस टीम का भय इन डकैतों में अक्सर झलकता था। इसके बाद उनके परिजन बीमारी की बात कहकर ज्यादा पूछताछ नहीं करने दी।  ब्यूरो
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