अतर्रा। आग से झुलसी पत्नी की कानपुर में मौत के अगले ही दिन संदिग्ध हालात में पति का शव हमीरपुर जनपद के तेंदुही गांव में फांसी पर लटका मिला। उसके शव का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। उधर, पत्नी का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम के ही कर दिया गया।
बल्लान गांव के मजरा दिक्षितन पुरवा में 28 फरवरी को ससुराल में आशा (40) ने खुद को आग लगा ली थी। घटना की वजह घरेलू कलह बताई गई थी। गंभीर हालत में उसे उसका भाई पप्पू जिला अस्पताल लाया। यहां से कानपुर रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान आशा के परिजनों और ससुराल वालों के बीच कहासुनी हो गई।
इसी बीच दो मार्च को आशा की कानपुर में ही मौत हो गई। ससुराल वालों से हुए विवाद के बाद आशा का पति बृजेश कानपुर से कहीं चला गया। अगले दिन तीन मार्च को हमीरपुर जिले के तेंदुही (सुमेरपुर थाना) गांव में उसका शव खेत में लगे पेड़ पर फांसी पर लटका मिला।
पुलिस ने उसकी जेब से मिले पहचान पत्र के आधार पर घर वालों को सूचना दी और पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। शनिवार को यहां उसके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि पत्नी आशा का उसके मायके ओरन में अंतिम किया गया।
माता-पिता की मौत के बाद उनके दो बच्चे हरीओम (12) और ओम (5) अनाथ हो गए। फिलहाल दोनों बच्चों को उनका मामा अपने साथ ओरन गांव ले गया है। दोहरी मौतों से गांव में शोक है। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।