बांदा। इलाज में लापरवाही का आरोप लगा तीमारदारों ने जिला अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों की पिटाई कर दी। कुछ असलहाधारी लोगों ने गोली मारने की भी धमकी दी। यह देख डाक्टर और कर्मचारी जान बचाकर भागे। घटना के विरोध में डाक्टर और स्टाफ ने हड़ताल कर दी। लगभग एक घंटे तक कामकाज ठप रहा। मंडलायुक्त के आश्वासन पर डॉक्टर और कर्मचारी काम पर लौटे। कोतवाली प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएन गुप्ता, ईएमओ डॉ. बलवीर, चीफ फार्मेसिस्ट देवेंद्र कुमार त्रिपाठी और रजिस्ट्रेशन क्लर्क राहत बक्श ने पुलिस को बताया कि शनिवार को सुबह करीब साढ़े सत बजे पांच-छह लोग एक व्यक्ति को मरणासन्न अवस्था में जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर लेकर आए। मरीज का परीक्षण करने के बाद साथ आए परिजनों को बताया गया कि मरीज की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। इस पर परिजन भड़क गए।
आक्सीजन और मशीन लगाने को कहा। आक्सीजन लगाई गई। इसके बाद भी परिजन स्टाफ के साथ अभद्रता कर मारपीट पर उतारू हो गए। डॉ. बलवीर भाग निकले। तीमारदारों ने देवेंद्र त्रिपाठी को दो-तीन थप्पड़ जड़ दिए। साथ आए बंदूकधारियोें ने गोली मारने की धमकी दी। अभिलेख फाड़ने का प्रयास किया। स्टाफ जान बचाकर अस्पताल से भागा। तहरीर में यह भी कहा गया है कि सीएमएस को मोबाइल फोन पर गोली मारने की धमकी दी और अभद्रता की।
उधर, घटना से खफा अस्पताल का पूरा स्टाफ काम छोड़कर बाहर आ गया और एकजुट होकर नारे लगाने लगे। सिर्फ इमरजेंसी चलती रही। सीएमएस के नेतृत्व में डाक्टराें का प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिला। आयुक्त ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद डाक्टर और स्टाफ काम पर लौट आए। मंडलायुक्त से मिलने वालों में संयुक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. एनडी शर्मा, डॉ. टीआर सरसैया, डॉ. एसएन वाजपेई, डॉ. मुकेश, डॉ. आरके गुप्ता भी शामिल रहे।
डॉक्टरों की तहरीर पर केस दर्ज, मृतक के पिता ने भी दी तहरीर
बांदा। अस्पताल में हंगामा प्रकरण पर सीएमएस और डाक्टर व स्टाफ द्वारा दी गई तहरीर पर कोतवाली में सात-आठ अज्ञात लोगों के विरुद्ध सरकारी काम में बांधा, मारपीट और दहशत फैलाने आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। कोतवाली प्रभारी कुशलपाल सिंह ने बताया कि फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
उधर, अस्पताल मेें मरे अधिवक्ता देवेंद्र सिंह के पिता शिवशरण सिंह ने मंडलायुक्त और डीएम को तहरीर देकर अस्पताल के डाक्टरों और स्टाफ पर धौंस धमकी और पैसे की मांग पूरी न होने पर इलाज न करने की रिपोर्ट दर्ज करने का अनुरोध किया है। कहा है कि अपने पुत्र को वह जीवित अवस्था मेें अस्पताल लाए थे। यहां इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉ. बलवीर शराब के नशे में थे।
उन्होंने इलाज की बात अनसुनी कर दी। उनके जोर देने पर डॉ. बलवीर व चीफ फार्मेसिस्ट देवेंद्र त्रिपाठी ने उनसे अभद्रता की और ट्रामा सेंटर से निकल जाने को कहा। वह पुत्र की जान बचाने के लिए आक्सीजन लगाने की फरियाद करते रहे। इसके लिए 2000 रुपये मांगे गए।
उन्होंने इसकी शिकायत फोन पर सीएमएस से की तो उन्होंने भी अभद्रता करते हुए स्टाफ की मांग पूरी करने को कहा। बमुश्किल आक्सीजन सिलेंडर लाकर रख दिया, लेकिन पैसे न मिलने पर आक्सीजन नहीं लगाई। अंतत: उनके अधिवक्ता पुत्र की मौत हो गई। शिवशरण सिंह ने डॉक्टर व फार्मेसिस्ट पर धमकाने का भी आरोप लगाया है। उधर, कोतवाली प्रभारी ने फिलहाल मृतक के पिता द्वारा दी गई यह तहरीर न मिलने की बात कही है।