बांदा। पुलिस मुठभेड़ के मामले में दस्यु संग्राम सिंह और उसके भाई राजाबाबू सिंह समेत तीन अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष पुलिस के अलावा कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
दस्यु संग्राम सिंह गैंग ने 22 फरवरी 2014 को अपने गांव नौगवां (कालिंजर) निवासी लाला उर्फ भरोसे लाल पुत्र कौशल का अपहरण कर लिया था। तत्कालीन कालिंजर थानाध्यक्ष अमर सिंह ने नरैनी कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 25 फरवरी 2014 को वह फोर्स के साथ अपहृत लाला की तलाश में थे। पुन्ना डेरा के जंगल में रात को बदमाशों ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। दोनों तरफ से गोलियां चलने के कुछ देर बाद बदमाश अपहृत को छोड़कर भाग निकले।
अपहृत लाला के बयानों के मुताबिक पुलिस ने दस्यु सरगना संग्राम सिंह व उसके भाई राजाबाबू सिंह पुत्रगण बलवान सिंह व लोटन उर्फ श्यामकरन सिंह (गाजीपुर, जसपुरा) पर धारा 307 व 7 क्रिमिलन ला एमेडमेंट एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) हरिनाथ पांडेय की अदालत में सुनवाई हुई। साक्ष्य देने सिर्फ पुलिस कर्मी आए। दस्युओं के नाम बताने वाले स्वतंत्र गवाह अपहृत लाला को भी पेश नहीं किया गया। शनिवार को अदालत ने संदेह के आधार पर तीनों को बरी कर दिया गया। संग्राम सिंह व राजाबाबू सिंह जेल में हैं।