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दो सचिवों समेत तीन कर्मियों से मांगा स्पष्टीकरण

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। ग्राम प्रधान और सचिवों ने बिना काम कराए लाखों रुपये का बंदरबांट कर लिया। मुख्य विकास अधिकारी ने नाला व पुलिया निर्माण के नाम पर 3.29 लाख रुपये की धांधली में दो सचिवों समेत तीन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बीडीओ के माध्यम से 15 दिन में साक्ष्यों के साथ जवाब न देने पर विधिक व विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है।

सीडीओ ने खंड विकास अधिकारी महुआ कमल किशोर कमल को भेजी नोटिस में कहा कि ग्राम पंचायत निवादा मलहरा में हेमंत कुमार द्विवेदी की शिकायत पर 28 दिसंबर को जांच की गई। तकनीकी सहायक ने कब्रिस्तान के पास पुलिया निर्माण के लिए वर्ष 2016-17 में 2.54 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया।
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बीडीओ ने वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दे दी। मजदूरी पर 74,200 और सामग्री पर 1.71 लाख रुपये खर्च किए जाने थे। इसके सापेक्ष ग्राम पंचायत ने 1.35 लाख की सामग्री तीन जून को खरीदी। मौके पर एक भी सामग्री नहीं मिली। न ही ग्राम पंचायत द्वारा कार्य कराया गया। धन का दुरुपयोग मिला।

उधर, रामकिशोर प्रजापति के घर से पूरन यादव के घर तक नाला निर्माण में 3.39 लाख की स्वीकृति ली। प्रधान ने 24 मार्च 2017 1.93 लाख की सामग्री बड़ोखर बुजुर्ग से खरीदी और बिल लगाया। जांच में मौके पर कोई सामग्री नहीं मिली न कोई कार्य हुआ।

सीडीओ ने कहा कि निरीक्षण आख्या से स्पष्ट है कि तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी प्रेमनारायण और मौजूदा ग्राम विकास अधिकारी कमलेश प्रजापति, तकनीकी सहायक महुआ ब्रजकिशोर अवस्थी ने ग्राम पंचायत में मनरेगा अधिनियम के खिलाफ मनमानी ढंग से कार्य किया।
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दोनों कार्यों में प्रधान ने 3.29 लाख रुपये फर्जीवाड़ा कर निकाल लिया। इसमें तीनों कर्मचारी भी उत्तरदायी हैं। सीडीओ ने 15 दिन में स्पष्टीकरण साक्ष्यों व अभिलेखों के साथ बीडीओ के माध्यम से मांगा है। कहा कि संतोषजनकजवाब नहीं मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दो सचिवों समेत तीन कर्मियों से मांगा स्पष्टीकरण
नाला-पुलिया निर्माण में 3.29 लाख का बंदरबाट
15 दिन में जवाब न देने पर होगी विधिक कार्रवाई
डीसी की जांच में निवादा मलहरा गांव में खुलासा
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