बांदा। 108 एंबुलेंस सेवा की संवेदनहीनता और लापरवाही युवती की मौत का सबब बन गई। जहर खाने से नाजुक हालत में पहुंच गई युवती को अस्पताल ले जाने के लिए एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। इस पर युवती को टेंपो से अस्पताल ले जाया गया। इलाज में देरी से उसकी मौत हो गई।
गिरवां थाना क्षेत्र के बनसखा गांव में रविवार को सुबह मिथलेश देवी (35) पत्नी शिवकुमार ने घरेलू कलह के चलते जहर खा लिया। उसके मात्र छह वर्षीय पुत्र है। पति कर्नाटक में मजदूरी करने गया है। पड़ोस में रह रहे जेठ राजकुमार ने 108 एंबुलेंस को फोन किया। राजकुमार का कहना है कि कार बार फोन करने पर हर बार यही जवाब मिलता रहा कि एंबुलेंस आ रही है।
लगभग एक घंटा बीत गया और एंबुलेंस नहीं आई। इस बीच मिथलेश की हालत बिगड़ती चली गई। अंतत: राजकुमार और अन्य लोग मिथलेश को टेंपो से बांदा जिला अस्पताल लाए। यहां कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। भाई देवेंद्र (निवासी कुचारम, चित्रकूट) ने जहर खाने की वजह से अनभिज्ञता जताई।
कहा कि फोन पर मायके में मिथलेश ने कोई ऐसी बात नहीं बताई। एंबुलेंस की लेटलतीफी से परिजनों में रोष रहा। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उधर, एंबुलेंस के न आने का जवाब जानने के लिए एंबुलेंस सेवा के स्थानीय सुपरवाइजर को बार-बार फोन किया गया, लेकिन रिसीव नहीं हुआ।