बांदा। मटौंध थाने मेें घुसकर अभिलेख फेंकने और पुलिस द्वारा बाहर निकालने पर पथराव व राष्ट्रीय राजमार्ग में जमा लगाकर आवागमन ठप करने के मामले में 12 आरोपियों द्वारा कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद सत्र न्यायालय से अंतरिम जमानत मिल गई।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 12 सितंबर 2015 को आरोपियों ने थाने में घुसकर हंगामा मचाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया था। पुलिस ने बाहर निकालने की कोशिश तो पथराव कर दिया। पुलिस ने हमलावरों के विरुद्ध धारा 147, 149, 332, 353, 341, 336, 504 व 452 समेत 7 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। शुक्रवार को 12 आरोपियों ने अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन अमित कुमार यादव की अदालत में आत्मसमर्पण किया।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सभी की अदालत अर्जी खारिज कर दी। आरोपियों के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने सत्र न्यायाधीश भूपेंद्र सहाय की अदालत में जमानत की अर्जी दी। साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा ‘सेम डे’ सुनवाई का आदेश भी प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया और पुलिस आख्या मंगाने को कहा।
अदालत ने सभी को 14 जून तक के लिए अंतिम जमानत पर रिहा कर दिया। उनसे 20 हजार रुपये के निजी बंधपत्र भरवाए गए। आत्मसमर्पण करने वाले अभियुक्तों में संजय सिंह, अनुरुद्ध सिंह, नाना शुक्ला, श्यामजी तिवारी, मनमोहन सिंह, ब्रजराज सिंह, ज्ञान सिंह, दारा सिंह, सितेंद्र सिंह, संजय तिवारी, मनोज कुमार व स्वयंबर सिंह शामिल थे। जमानत पर अगली सुनवाई 14 जून को होगी।