बांदा। नरैनी कोतवाली क्षेत्र के नंदवारा गांव में दो मासूम सगे भाइयों की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी विशेष जांच दल (एसआईटी) अब बच्चों से भी जानकारी जुटा रही है।
शुक्रवार को सीओ के नेतृत्व में टीम करीब पांच घंटे गांव में रही। इस दौरान दो बार घटनास्थल का सीन रिक्रिएट किया गया। साथ ही हमउम्र बच्चों से खेल-खेल में और दुलार के साथ कई सवाल पूछे गए।
गांव में एसआईटी की लगातार मौजूदगी और पुलिस की सुरागरसी के बीच सन्नाटा पसरा है। उधर, पुलिस बच्चों से पूछताछ के दौरान विशेष सावधानी बरत रही है, ताकि वे सहज होकर घटना से जुड़ी बातें बता सकें।
टीम ने बच्चों से पूछा कि घटना वाले दिन मनोज और युवराज को कहां खेलते देखा था, वे किस ओर गए थे और क्या उन्हें कोई बुलाने आया था। पुलिस को उम्मीद है कि बच्चों की बातचीत से हत्याकांड से जुड़ा कोई अहम सुराग मिल सकता है।
सीओ सिटी एवं एसआईटी प्रमुख सौरभ सिंह ने बताया कि टीम नंदवारा में हत्याकांड की जांच कर रही है। जांच में बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है। टीम ने दो बार सीन रिक्रिएशन किया है। अब तक गिरफ्तार पांच आरोपियों में पिता-पुत्र की ही भूमिका संदिग्ध मिल रही है।
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बच्चों की बहन के वीडियो बयान को भी जांच में शामिल किया
घटना के बाद दोनों मासूमों की 10 वर्षीय इकलौती बहन का वीडियो बयान सामने आया था। उसने बताया था कि उसके भाइयों के साथ मारपीट की गई थी। एसआईटी इस बयान को भी जांच में शामिल कर रही है। उधर, हत्याकांड के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने पर बीट दरोगा राजेश कुमार और बीट सिपाही अनुज कुमार को निलंबित किया गया था। इसके बाद हत्याकांड के खुलासे के लिए एसआईटी गठित की गई। टीम में सीओ सिटी सौरभ सिंह, सीओ नरैनी प्रवीण यादव, गिरवां इंस्पेक्टर सुरेश सैनी, नरैनी के इंस्पेक्टर क्राइम अर्जुन सिंह, तिंदवारी थानाध्यक्ष संदीप सिंह, बदौसा थानाध्यक्ष राधाकृष्ण तिवारी, एसओजी प्रभारी आनंद कुमार और सर्विलांस प्रभारी राजेश मौर्य शामिल हैं।
शुक्रवार को सीओ सिटी सौरभ सिंह और विवेचक गिरवां इंस्पेक्टर समेत टीम के सदस्य गांव में मौजूद रहे। उधर, हत्याकांड के राजनीतिक मोड़ लेने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी जांच पर नजर रख रहे हैं। वे एसआईटी से लगातार बातचीत कर जांच की कड़ियों की जानकारी ले रहे हैं।
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पानी भरे गड्ढे में मिले थे दोनों भाइयों के शव
नंदवारा निवासी भइयाराम राजपूत ने एक अक्तूबर को नरैनी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका छह वर्षीय बेटा मनोज और चार वर्षीय युवराज 30 सितंबर की दोपहर घर के बाहर खेलते समय लापता हो गए थे।
रात करीब साढ़े आठ बजे दोनों के शव घर से कुछ दूरी पर एक दुकान के पीछे पानी से भरे गड्ढे में मिले थे। पोस्टमार्टम में सिर में चोट लगने से मौत की पुष्टि हुई थी। भइयाराम की तहरीर पर पूर्व मंत्री सुरेंद्र पाल वर्मा के पुत्र और पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र पाल वर्मा समेत नौ लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
नामजद आरोपियों में शेरा उर्फ ओमकार, भवानीदीन, अखिलेश, सुनीता, अर्चना, रामलली, लंबरी और सुरेंद्र नेता भी शामिल हैं। इनमें भवानीदीन, अखिलेश, रामलली, लंबरी और सुरेंद्र नेता को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। सभी को न्यायालय ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
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मां के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुआ महेंद्र पाल वर्मा
दोनों मासूम भाइयों की हत्या में नामजद पूर्व मंत्री सुरेंद्र पाल वर्मा का पुत्र और पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र पाल वर्मा 30 सितंबर से ही गायब है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वह लगातार वीडियो बयान जारी कर स्थानीय पुलिस और एसआईटी की जांच पर सवाल उठा चुका है। उसने एसआईटी जांच पर भरोसा न होने की बात कहते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन अब तक पुलिस के सामने नहीं आया है। वह अपनी मां के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुआ था।
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धोखाधड़ी के मामले में देवेंद्र की गिरफ्तारी नहीं
धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय से जारी वारंट और कुर्की की कार्रवाई भी अब तक नहीं हो सकी है। इस मामले में आरोपी महेंद्र पाल वर्मा का पुत्र और प्रधान देवेंद्र पाल अपनी दादी के अंतिम संस्कार के बाद लखनऊ चला गया था। पुलिस अब तक उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी है। बताया जा रहा है कि पुलिस को अभी न्यायालय का आदेश भी प्राप्त नहीं हुआ है। इसके चलते देवेंद्र पाल वर्मा की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।