बांदा। उत्तर प्रदेश उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक प्रश्न पर विवाद खड़ा हो गया है। इसमें ''अवसर के अनुसार बदल जाने वाला'' वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनने को कहा गया था। विकल्पों में ''पंडित'' शब्द भी था, जिस पर ब्राह्मण संगठनों ने आपत्ति जताई है।
संगठनों का कहना है कि पंडित शब्द का अर्थ विद्वान होता है। यह सम्मान से जुड़ा शब्द है, पर आम बोलचाल में ब्राह्मणों के लिए भी प्रयोग होता है। इसे नकारात्मक संदर्भ वाले प्रश्न में विकल्प के रूप में रखना गलत और आपत्तिजनक है। इससे समाज की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हो सकती है। उन्होंने ऐसे प्रश्नों की समीक्षा कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सावधानी बरतने की अपील की गई है।
लोगों की प्रतिक्रिया
अंतर राष्ट्रीय ब्राह्मण संगठन के प्रदेश महासचिव संकटा प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि पंडित शब्द का अर्थ विद्वान होता है और यह सम्मान से जुड़ा हुआ शब्द है। इसे किसी नकारात्मक संदर्भ वाले प्रश्न में विकल्प के रूप में रखना उचित नहीं है। परीक्षा संस्थाओं को ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने इस प्रश्न को ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत करने वाला बताया है। आमतौर पर पूजा-पाठ कराने वाले ब्राह्मणों को ही पंडित कहा जाता है। ऐसे में इस शब्द का इस तरह उपयोग करना गलत संदेश देता है।
विप्र एकता मंच के बुंदेलखंड प्रभारी अभिषेक बाजपेयी ने बताया कि परीक्षा के दौरान जब यह प्रश्न आया तो कई अभ्यर्थियों के बीच भी चर्चा हुई। हमें लगा कि विकल्पों में पंडित शब्द होना थोड़ा अजीब है। प्रश्नपत्र बनाते समय इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।
पं. सारंग महाराज ने बताया कि भाषाई दृष्टि से पंडित का अर्थ विद्वान होता है, लेकिन सामाजिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण होते हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने वालों को ऐसे शब्दों के प्रयोग में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
फोटो- 35 संकटा प्रसाद त्रिपाठी।
फोटो- 35 संकटा प्रसाद त्रिपाठी।
फोटो- 35 संकटा प्रसाद त्रिपाठी।