राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत बांदा जनपद
को स्वतंत्रता दिवस पर मोतियाबिंद मुक्त घोषित किए जाने की तैयारियों पर
बांदा जिले के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आड़े आ गई।
इससे नाराज
मंडलायुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक
को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को
चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश अपर निदेशक (स्वास्थ्य) को दिए
हैं।
मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी ने पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस पर
बांदा जनपद को मोतियाबिंद मुक्त घोषित किए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कैंप लगाकर मोतियाबिंद के मरीज चिह्नित
कर आपरेशन करने का निर्देश दिया था।
यह भी कहा था कि जिला
चिकित्सालय के नेत्र विभाग में आपरेशन के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाएं,
लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों ने मंडलायुक्त के निर्देशों
पर तवज्जो नहीं दी। मरीजों को अस्पताल में सुविधाएं नहीं दी गईं। गुरुवार
को मंडलायुक्त ने मोतियाबिंद आपरेशन की समीक्षा की।
इसमें जिला
अस्पताल के नेत्र विभाग में हुईं लापरवाहियां उजागर हुईं। पता चला कि
कर्मचारियों ने आदेशों का पालन नहीं किया। मरीजों को काफी असुविधा हुई।
मंडलायुक्त ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला अस्पताल के मुख्य
चिकित्साधीक्षक डॉ. शेखर को लापरवाही और निर्देशों की अवहेलना के आरोप में
प्रतिकूल प्रविष्टि दी है।
साथ ही अपर निदेशक स्वास्थ्य को आदेश
दिए कि मोतियाबिंद आपरेशन मेें लापरवाही बरतने वाले वार्ड ब्वाय को चिह्नित
कर उसके विरुद्ध अनुशासनहीनता और विभागीय कार्रवाई की जाए।
आयुक्त
ने कहा कि इस काम में लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों और
कर्मचारियों को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने मोतियाबिंद आपरेशन कैंप लगाकर
मरीजों का निशुल्क आपरेशन करने और उन्हें सरकारी सुविधाएं देने के आदेश दिए
हैं।