डीएम की ड्योढ़ी पर आए भूख से मरने वाले दलित नत्थू की पत्नी व बच्चे।
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बांदा। भूखे नत्थू की मौत के बाद उठे सियासी भूचाल पर अगले ही दिन मुख्यमंत्री द्वारा मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा फिलहाल कोरी साबित हो रही है। एक पखवारा बीत जाने के बाद मृतक की विधवा और बच्चों को धेला नहीं मिला।
मुख्यमंत्री की इस मदद की जानकारी मृतक के परिजनों ने उनके घर जाकर सपा जिलाध्यक्ष और डीएम ने दी थी। शनिवार को मृतक के पूरे परिवार ने डीएम की ड्योढ़ी पर दस्तक देकर घोषित मदद दिए जाने की मांग की।
नरैनी क्षेत्र के मूंगुस का पुरवा गांव में एक मई को दलित नत्थू पड़ोसी गांव ऐला सरकारी राशन लेने जा रहा था। उसके घर चार दिनों से फाकाकशी चल रही थी। चूल्हा नहीं जला था। भूखे पेट डेढ़ किलोमीटर दूरी का सफर तय करते समय रास्ते में हैंडपंप से पानी पीते ही उसकी मौत हो गई थी।
‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले और प्रमुखता से यह खबर प्रकाशित की थी। इस पर अगले ही दिन सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी और उसके अगले दिन डीएम योगेश कुमार मूंगुस का पुरवा में मृतक के आश्रितों से मिले थे और उन्हें बताया था कि मुख्यमंत्री ने उन्हें पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद स्वीकृत की है, लेकिन धीरे-धीरे करके पूरा पखवारा बीत चुका है।
अब तक नत्थू की विधवा या बच्चों को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित पांच लाख रुपये नहीं मिले। शनिवार को मुन्नी अपने सभी बच्चों के साथ बांदा आई और डीएम आवास गई। डीएम जिले से बाहर होने से नहीं मिल सके। विधवा मुन्नी ने अपने अर्जी डीएम के आवास पर उनके विशेष कार्याधिकारी को सौंप दी। इसमें मांग की है कि घोषित सहायता राशि उसे प्रदान की जाए।