बांदा। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव और शिशुओं की देखभाल लिए ‘गृह भेंट योजना’ शुरू की है। एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और आशा के सहयोग से इसका संचालन होगा।
रजिस्टर में गांव के सभी परिवारों का ब्योरा और मुखिया का नाम दर्ज होगा। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्री निर्धारित समय पर गर्भवती के घर जाकर मुलाकात करेंगी। इसे गृह भेंट नाम दिया गया है। गर्भावस्था में देखभाल से लेकर प्रसव के बाद तक महिला को सभी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएंगी। नवजात की देखभाल और उसे सेहतमंद बनाने में भी इनका अहम रोल होगा।
स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास परियोजना विभाग के संयुक्त सहयोग से यह योजना चित्रकूटधाम मंडल में जुलाई से शुरू की गई है। गृह भेंट योजना का उद्देश्य गांव में सही समय पर परिवारों को सही सलाह देना है। सुपरवाइजर और एएनएम की मानीटरिंग में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का इसमें मुख्य रोल होगा।
आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पास डाटा ट्रांसफर शीट और गृह भेंट योजना का रजिस्टर होगा। इसमें गांव के सभी परिवारों के नाम होंगे। जिस घर में गर्भवती महिला होगी वहां गर्भावस्था से शिशु के 15 माह के होने तक हर तरह की मदद करेंगी। गृह भेंट योजना रजिस्टर में माता और बच्चे का नाम, प्रसव की संभावित तिथि और प्रसव की तिथि दर्ज होगी।
आशा और कार्यकत्रियां गर्भवती की सभी जांच कराएंगी और टीके लगवाएंगी। प्रसव से एक माह पहले से उनके घर जाकर गृह भेंट करेंगी और तैयारियों के सुझाव देंगी। यदि घर में प्रसव कराना चाहते हैं तो वहीं सभी सुविधाएं व तैयारियां कराएंगी।
यदि अस्पताल में कराने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो आसपास के कुछ अस्पतालों की जानकारी देंगी। वाहन से अस्पताल तक पहुंचाने और प्रसव कराने में सहयोग करेंगी। प्रसव के बाद स्तन पान से लेकर बच्चे के छह माह होने तक बराबर देखभाल होगी। सुपरवाइजर और एएनएम हर सप्ताह इनकी मीटिंंग लेंगी और सारी तैयारियों की समीक्षा करेंगी। रिपोर्ट अपर सीएमओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी को भी नियमित देंगी। बेहतर काम करने वाली महिला कर्मियों को अतिरिक्त प्रोत्साहित व पुरस्कृत किया जाएगा।
गृह भेंट योजना के क्रियान्वयन के लिए सुपरवाइजर और एएनएम को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये अपने-अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आशा को प्रशिक्षित करेंगी। योजना का मकसद जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर कम करना और शिशुओं व प्रसूताओं को स्वस्थ रखना है।
-एबी कटियार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बांदा।