बांदा। शासन ने सभी योजनाओं में आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है, पर आधार बनाने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिख रही है। छात्र-छात्राओं से स्कूलों में आधार कार्ड मांगा जा रहा है, वहीं फार्मर रजिस्ट्री में किसानों से आधार लिया जा रहा है। नौनिहाल व किसान आधार संशोधन तथा नए बनवाने के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। बच्चों की स्कूल की पढ़ाई भी छूट रही है।
शासन-प्रशासन ने आधार कार्ड बनाने के लिए सभी डाकघरों और बैंकों को जिम्मेदारी सौंपी है, पर ज्यादातर बैंकों में आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। यही स्थिति डाकघरों की भी है। प्रधान डाकघर में दो काउंटर खोले गए हैं। इसके अलावा कचहरी स्थित उप डाकघर में भी एक काउंटर खुला है। प्रधान डाकघर के सामने स्थित देना बैंक में भी आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। जबकि सभी तहसील और ब्लाक मुख्यालयों में भी बैंकों तथा डाकघरों को आधार बनाने के निर्देश दिए गए हैं, पर यहां नहीं बनाए जा रहे हैं। इससे स्कूली बच्चों को अपनी पढ़ाई छोड़कर यहां जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। एक-एक काउंटर में औसतन एक दिन में 50 से 60 आधार बनाए जा रहे हैं। जबकि एक काउंटर पर लाइन में करीब 200 से ज्यादा लोग लग रहे हैं। ऐसे में तमाम छात्र-छात्राएं मायूस होकर घर चले जाते हैं। दूसरे दिन सुबह पांच बजे से फिर लाइन में जम जाते हैं। बुधवार को आधार कार्ड के लिए प्रधान डाकघर आए बच्चों ने अपनी पीड़ा साझा की। कहा कि आधार बनवाना लोहे के चने चबाने जैसा है।