फोटो - 06 जंगल में पड़ा बाघ का शव। स्त्रोत : विभाग
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करतल। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध मौतों का सिलसिला जारी है। जिससे वन्यजीव प्रेमियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में दो नर बाघों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बीती 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध मौत हुई थी। जिसे हाल ही में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था। इससे पहले गंगऊ अभयारण्य क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिला था, जिसकी मौत लगभग दो सप्ताह पहले हो चुकी थी। वन विभाग को इसकी जानकारी एक स्थानीय ग्रामीण से मिली, जिससे निगरानी तंत्र की विफलता उजागर हुई।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव ने घटना की सूचना समय पर न देने को अक्षम्य अपराध बताया और पन्ना कोर रेंजर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। मृत्यु का कारण फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, जो प्राकृतिक, शिकार या अन्य कारणों का पता लगाएगी।