बांदा। सीडीओ की क्लास में कई सुपरवाइजर फेल हो गईं। ये गर्भवती महिलाओं के होने वाले टेस्टों के बारे में नहीं बता सकीं। इस पर सीडीओ ने कड़ी चेतावनी दी। कामों में सुधार लाने का अल्टीमेटम दिया।
विकास भवन सभागार में शुक्रवार को मातृ एवं शिशु पोषण सुधार के लिए हौसला योजना के तहत सीडीपीओ, सुपरवाइजर, प्रभारी चिकित्साधिकारी, डीपीएम, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, एबीएसए और एनजीओ की महिलाओं का प्रशिक्षण कैंप लगाया गया। पहले माड्यूल के इस प्रशिक्षण में गर्भवती महिलाओं और बच्चों में उनके पोषण, स्वास्थ्य, प्रसव पूर्व बरती जाने वाली सावधानियां, गर्भ निरोधक के प्रयोग को बढ़ावा, दवा के प्रति जागरूकता आदि के बारे में बताया गया।
प्रशिक्षण के दौरान सीडीओ ने अपने गोद लिए गांव डिंगवाही की सुपरवाइजर व महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री से सवाल किया कि गर्भवती महिलाओं में कितने टेस्ट होते हैं? इस पर यह दोनों बगलें झांकती रह गईं। एक ने बताया तीन तो दूसरी अपने बैग में पड़ी किताब देखने लगीं। सीडीओ ने दूसरी सुपरवाइजरों से सवाल किया कि गर्भवती महिलाओं के कौन-कौन से टेस्ट होते हैं? सुपरवाइजर यह जवाब भी नहीं दे पाईं।
सीडीओ आरके सिंह ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और महिला कर्मियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। कहा कि यह बड़े ही खेद की बात है कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल और टीका, इलाज आदि के लिए लगाईं गईं महिला कर्मियों को जरा भी ज्ञान नहीं है। बाद में अपर सीएमओ डॉ. एबी कटियार ने टीका और टेस्टों के बारे में जानकारी दी।
डीपीएम कुशल यादव ने एनआरएचएम से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए शासन की ओर से इलाज से लेकर खाने और आने-जाने की सभी व्यवस्थाएं मुफ्त हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी आरडी यादव ने हौसला योजना के बारे में बताया। सही क्रियान्वयन के संचालन के टिप्स दिए।
बाल विकास परियोजना अधिकारी अर्जुन सिंह ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना को ईमानदारी और लगन के साथ क्रियान्वित कराएं, ताकि सभी गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को इसका लाभ मिल सके।