फोटो- 02 बांदा-तिंदवारी हाईवे पर इंदरा नगर के पास सड़क खड़े गोवंश। संवाद
फोटो- 03 पदमाकर चौराहे पर धूप सेंकते हुए ठंड से बेहाल पशु। संवाद
फोटो- 04 कचहरी रोड पर जीआईसी के पास कूड़ाघर में खाने की तलाश करते पशु। संवाद
फोटो- 05 कालूकुआं रोड पर आवासीय कालोनी की बाउंड्री के किनारे बैठे पशु। संवाद
- पिछले 11 माह में पशुओं से टकराने पर 11 वाहन चालकों की जा चुकी है जान
- सड़क हो या हाईवे हर जगह नजर आ रहे बेसहारा मवेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बांदा। प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद जिले में बेसहारा पशुओं को संरक्षण न मिल पाने की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 307 स्थायी व अस्थायी गो-आश्रय स्थलों में शत प्रतिशत गोवंशों के संरक्षण के सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बीच सड़क व हाईवे पर घूम रहे बेसहारा पशुओं का हाल बेहाल है। भूखे, प्यासे, कमजोर और बीमार पशु जहां दम तोड़ रहे हैं, वहीं ये सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रहे हैं। बीते 11 महीनों में पशुओं के सड़क पर आ जाने से 332 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 23 पशुओं और 11 वाहन चालकों की जान चली गई।
गोशालाओं की दुर्दशा और बेसहारा पशुओं की पीड़ा
महुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत गिरवा में गोशाला की स्थिति अत्यंत दयनीय है। कड़ाके की सर्दी में गौशाला में मौजूद गोवंशों की हालत नाजुक है। स्थानीय ग्रामीण ऋषभ ने बताया कि पशुओं को खाने में केवल धान का पुआल काटकर दिया जा रहा है, जो उनके पोषण के लिए अपर्याप्त है। यहां आधे दर्जन से अधिक गोवंशी बीमार हैं और गोशाला परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस संबंध में सचिव अनुज कुमार ने जांच की बात कही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बुधवार की सुबह पड़ताल करने पर दर्जनों की संख्या में बेसहारा पशु सड़क पर ठंड से कंपकंपाते दिखे। इनमें से किसी भी मवेशी की टैगिंग नहीं की गई थी, जिससे उनकी पहचान और प्रबंधन में बाधा आ रही है।
सड़कों और हाईवे पर मवेशियों का जमावड़ा
- सुबह 10 बजे बांदा-तिंदवारी हाईवे पर इंदिरा नगर के पास सड़क पर बड़ी संख्या में बेसहारा पशु ठंड से ठिठुरते नजर आए। कोहरे के बीच एक दुकान के बाहर जल रही आग की ओर पशु आकर्षित हो रहे थे। दुकानदार ने बताया कि आए दिन यहां पशुओं के वाहनों के सामने आ जाने से सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। नगर पालिका के कर्मचारी कुछ पशुओं को गोआश्रय स्थलों में ले जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वे फिर से सड़कों पर दिखने लगते हैं।
- सुबह 10:30 बजे, धूप निकलने पर पदमाकर चौराहे पर ठंड से बेहाल पशु धूप सेंकते हुए दिखाई दिए। रात के समय ये पशु ओवर ब्रिज के नीचे बैठे रहते हैं और सुबह होते ही भोजन की तलाश में शहर का रुख कर लेते हैं। भूखे पशु सब्जी के ठेलों से भोजन चुराने का प्रयास करते हैं, जिससे सब्जी विक्रेता उन्हें अक्सर मारते हैं। इस डर से भागते समय ये पशु वाहनों से टकरा जाते हैं, जिससे पशुओं और वाहन चालकों दोनों को चोटें आती हैं। दुकानदारों का कहना है कि ये पशु यूं ही घूमते रहते हैं और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
कूड़ाघरों में खाने की करते तलाश
सुबह 11 बजे कचहरी से महाराणा प्रताप चौक की ओर जाने वाली सड़क पर जीआईसी के पास कूड़ाघर में कई पशु खाने की तलाश करते दिखे। भूख के कारण कई पशुओं की चमड़ी हड्डियों से चिपकी हुई थी और वे ठंड से कांप रहे थे। बगल में स्थित जीआईसी मैदान में लगी प्रदर्शनी में जाने वाले लोग भी इन भूख से व्याकुल पशुओं के हमलों का शिकार हो चुके हैं, जिससे कई लोग घायल हुए हैं। पशुओं के हमलों से दुकानदार भी खासा परेशान हैं।
अधिकारियों के आवासों के पास भी असुरक्षा
सुबह नौ बजे से ही ठंड से बचने के लिए महाराणा प्रताप चौक से कालूकुआं की ओर जाने वाले मार्ग पर, जहां सर्वाधिक अधिकारियों के आवास हैं, वहां भी पशु बाउंड्री से सटकर बैठ जाते हैं। इस मार्ग से इलाहाबाद और कानपुर जाने वाले वाहनों की आवाजाही अधिक होती है। पास के महाविद्यालय में आने-जाने वाले छात्र-छात्राएं भी अक्सर इन पशुओं के कारण घायल हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि पशुओं के संरक्षण के नाम पर प्रशासन केवल दिखावा कर रहा है।
सड़क हादसों के आंकड़े चिंताजनक
पिछले 11 महीनों में पशुओं से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े भयावह हैं। कुल 332 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 23 पशुओं की मौत हुई और 43 अन्य घायल हुए। वहीं, 11 वाहन चालकों की जान चली गई और 65 घायल हुए। यह स्थिति सड़कों पर मवेशियों की बढ़ती संख्या और उनके प्रबंधन में प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।
गोशालाओं में संरक्षित पशुओं की स्थिति
फिलहाल, जिले की ग्राम पंचायतों में 265 अस्थायी गोशालाएं और शहर व गांवों में 42 स्थाई गोआश्रय स्थल संचालित हैं। अस्थायी गो आश्रय स्थलों में लगभग 47,000 गोवंशों को संरक्षित किया गया है, जबकि स्थाई गोआश्रय स्थलों में 8,555 गोवंश हैं। इन आंकड़ों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में पशु खुले में घूम रहे हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
वर्जन
शत प्रतिशत निराश्रित गोवंशों को आश्रय स्थलों में संरक्षित करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सड़क पर कोई बेसहारा गोवंशी पाया जाता है, तो उसे पकड़कर गोआश्रय स्थलों में संरक्षित किया जाएगा। कुछ पालतू पशु रात में छोड़ दिए जाते हैं, जिससे हादसे होते हैं। हाईवे किनारे के गांवों के पशुओं को रिफ्लेक्टर पट्टी लगाई गई है, ताकि वे दूर से वाहनों को नजर आ जाएं। हालांकि, यह कदम जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी है, यह देखना बाकी है।-अजय कुमार पांडेय, सीडीओ, बांदा