बांदा। पेट्रोल और डीजल को जीएसटी दायरे में लाने की व्यापारियों और कई संगठनों द्वारा की जा रही मांग से फिलहाल केंद्र सरकार ने किनारा कर लिया है। दलील दी कि पेट्रो उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिश जरूरी है। परिषद ने अभी इसकी सिफारिश नहीं की है।
बांदा के राज्य सभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद और चौधरी सुखराम सिंह यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री से प्रश्न किया था कि क्या सरकार पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखते हुए इसे जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करेगी। यह भी सवाल किया था कि क्या सरकार पेट्रो पदार्थों पर ऊपरी सीमा लगाने पर विचार करेगी, ताकि पेट्रोल और डीजल की दरों में एक सीमा से अधिक वृद्धि होने पर उसे नियंत्रित किया जा सके। सांसदों के सवाल का मंगलवार को राज्यसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लिखित जवाब दिया। उन्होंने संविधान की धारा का हवाला देकर कहा कि माल एवं सेवाकर परिषद उस तारीख के बारे में सिफारिश करेगी जिस तारीख से कच्चे पेट्रोलियम, हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर माल एवं सेवा कर को लगाया जाना होगा।
वित्त राज्य मंत्री ने सीजीएसटी एक्ट की धारा का हवाला देकर कहा कि इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिश जरूरी है। अभी तक जीएसटी परिषद ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी दायरे में लाने के बारे में कोई सिफारिश नहीं की है। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को क्रमश: 26 जून 2010 और 19 अक्तूबर 2014 से सरकार ने बाजार आधारित कर दिया है। तभी से सार्वजनिक क्षेत्रीय तेल विपणन कंपनियां (ओएनसी) अंतरराष्ट्रीय उत्पाद-कीमतों, कर संरचना, अंतरदेशीय माल भाड़ा और अन्य लागत संबंधी तत्वों के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बारे में यथोचित निर्णय ले रही है।