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बदइंतजामी का बस अड्डा, परिसर में फैली गंदगी

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Bus stand of mismanagement, dirt spread in the premises - फोटो : BANDA
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बांदा। परिवहन निगम हर माह यात्रियों से पांच लाख रुपये से अधिक सुविधा शुल्क लेने के बाद भी बस अड्डे पर बेहतर सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। आलम यह है कि मंडलीय बस अड्डे पर यात्रियों के बैठने के लिए न तो पर्याप्त कुर्सियां हैं और न ही पीने का साफ पानी। चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। पूछताछ केंद्र भी शाम छह बजे बंद हो जाता है। जानकारी के लिए रात भर सैकड़ों यात्री इधर-उधर भटकते रहते हैं।
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मंडलीय बस अड्डे से हर माह परिवहन निगम की बसों में औसतन पांच लाख से अधिक यात्री सफर करते है। निगम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर 200 किमी तक यात्रा करने वाले यात्री से प्रति टिकट एक रुपये और इससे अधिक दूरी की यात्रा पर दो रुपये सुविधा शुल्क लेता है। ऐसे में निगम को हर माह पांच लाख रुपये से सुविधा शुल्क देने के बाद यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं।
बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां न होने से यात्रियों खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। पेयजल उपलब्ध न होने से लोग पानी खरीदकर प्यास बुझाते हैं। शिकायतों के बाद भी बस अड्डे की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की जा रही हैं।
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चित्रकूट जा रहे यात्री सोनालिका पटेल और अश्वनी कुमार ने बताया कि पीने के पानी के लिए घड़े तो रखे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं है। डस्टबिन में कूड़ा भरा होने से यात्री न चाहकर भी खाने-पीने की पन्नियां खुले में फेंकते हैं। बस अड्डे के बाहरी हिस्से की नालियां खाली बोतलों और पॉलिथीन से भरी पड़ी हैं।
यात्री दिनेश ने बताया कि बस अड्डे का वाटर एटीएम बंद पड़ा है। इसमें अवैध रूप से पानी की बोतल और अन्य खाने-पीने का सामान बेचा जा रहा है। बोतल कटर मशीन न होने से यात्री पानी का इस्तेमाल करने के बाद बोतल वहीं पर फेंक देते हैं। जो धीरे-धीरे नाली में पहुंच जाती हैं। इससे गंदगी बढ़ रही है।
बस अड्डे का पूछताछ केंद्र एक गुमटी में चल रहा है। यहां यात्रियों को बसों की सही जानकारी नहीं मिल पाती है। शाम छह बजते ही यह बंद हो जाता है। शिव कुमार, राधिका का कहना है कि बसों के आने-जाने के बारे में पूछने पर यहां एक ही रटा रटाया जवाब दिया जाता है कि जो बस आएगी, वही जाएगी।
बस अड्डे पर गंदगी ज्यादातर पानी की बोतलों से हो रही है। वाटर एटीएम संचालक को मशीन ठीक कराने के लिए कहा गया है। परिसर की नियमित सफाई होती है। भीड़ अधिक होने से डस्टबिन भर गया होगा। पानी प्रतिदिन घड़ों में भरा जाता है। इसके लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। -परमानंद, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम, बांदा।

Bus stand of mismanagement, dirt spread in the premises- फोटो : BANDA

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