Bundelkhand's plantation scam will go to court
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में करीब एक दशक के दौरान हुए पौधरोपण में बडे़ पैमाने पर कथित घोटाले की पोल खोलने के लिए आरटीआई में मांगी गई जन सूचनाओं पर वन विभाग के अधिकारी लोपापोती और भ्रामक सूचनाएं दे रहे हैं। सूचना मांगने वाले समाजसेवी आशीष सागर दीक्षित ने कहा है कि बुंदेलखंड में हरियाली के नाम पर जेबें भरने वाले अपने कार्यों की खुद जांच करके भले बच निकलें, लेकिन अदालत से नहीं बच पाएंगे।
आशीष सागर ने बताया कि पिछले माह उन्होंने आरटीआई के तहत डीएफओ चित्रकूट से यह सूचना मांगी थी कि पिछली शिकायतों पर हुई जांच में क्या हुआ? जांच आख्या उपलब्ध कराएं। इस पर डीएफओ ने उन्हें 14 नवंबर का वह पत्र भेज दिया, जिसमें उन्हें जांच में साक्ष्य देने के लिए बुलाया गया था, जबकि वे 14 नवंबर को हलफनामा सहित साक्ष्य के रूप में 134 पेज के अभिलेख जांच अधिकारी को उपलब्ध करा दिए थे।
इतने गंभीर और बडे़ घोटाले की जांच रेंजर स्तर से कराई गई। आरोप लगाया कि डीएफओ जन सूचना अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर रहे हैं। आशीष के मुताबिक पिछले एक दशक में यहां पौधरोपण के नाम पर 3 अरब 16 करोड़ रुपये खर्च बताए गए हैं, जबकि पौधरोपण वाले स्थानों पर वन विभाग के सिर्फ फर्जी बोर्ड नजर आ रहे हैं पौध नहीं।
इसकी बानगी मंडल मुख्यालय के पास बांदा-दुरेड़ी मार्ग है। यहां वर्ष 2016 में 5 हजार पौधे कैंपा योजना के तहत लगाया जाना बताया गया था, लेकिन आज एक भी पौधा नहीं है। बबूल का जंगल है। आशीष ने कहा है कि जल्द ही बुंदेलखंड का वन घोटाला अदालत ले जाया जाएगा।