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बजट बकरियों का, खरीदे मेमने

Mon, 26 Dec 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
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बकरियों का निरीक्षण करते मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.लाखन सिंह।
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बुंदेलखंड पैकेज की बकरी पालन योजना में एक बार फिर ‘खेल’ हो रहा है। पूर्व में इस योजना में करोड़ों रुपये के वारे न्यारे हो गए। कोई भी लाभार्थी इस योजना से सरसब्ज नहीं हो पाया। अब फिर चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में बकरियों की जगह मेमने खरीदकर लाभार्थियों के हवाले कर दिए गए हैं। इसमें लगभग सवा तीन करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 771 लाभार्थियों को बकरी के मेमने दिए गए हैं।
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चित्रकूटधाम मंडल के लिए शासन ने इस वर्ष में 771 यूनिटों के लिए 3.15 करोड़ रुपये पशुपालन विभाग को दिए हैं। एक यूनिट में पांच बकरी और एक बकरा शामिल है। बांदा में 249 यूनिटों के लिए 69.47 लाख रुपये, चित्रकूट में 128 यूनिट के लिए 35.71 लाख, हमीरपुर में 232 यूनिट के लिए 64.73 लाख और महोबा जिले में 163 यूनिट के लिए 45.48 लाख रुपये दिए गए। पशुपालन विभाग ने बकरियों की खरीद में मानकों व शासनादेश की जमकर धज्जियां उड़ाईं।

शासनादेश के तहत लाभार्थी को दी जाने वाली बकरी 12 माह से ऊपर और बकरा 10 माह से ऊपर उम्र का होना चाहिए, लेकिन बांटी गईं बकरियों में ज्यादातर 8 माह से कम हैं। पशुपालन विभाग ने ये बकरियां जसवंत नगर (इटावा), चौरा मंडी (कानपुर) और बाबरपुर (कानपुर) के अलावा फतेहपुर से खरीदी हैं।
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प्रति बकरी चार हजार रुपये कीमत चुकाई गई है। बांदा में बकरी पालन के लिए 200 महिला स्वयं सहायता समूह का और 49 पालकों का चयन पशुपालन विभाग ने अपने स्तर से किया है। उधर, बकरी वितरण के बाद अब उनके लिए दाने की भी व्यवस्था की जा रही है। प्रति लाभार्थी 2900 रुपये के हिसाब से दाना खरीदा जाना है। मंडल में 771 यूनिट बकरियों के लिए 22 लाख रुपये खर्च करने की तैयारी है।

पहले की दो करोड़ की बकरियां गायब
बांदा। शासन ने इसके पहले वर्ष 2011-12 में पहले चरण में 635 यूनिट के लिए करीब दो करोड़ रुपये पशुपालन विभाग को दिए थे। बांदा में 171, चित्रकूट में 145, हमीरपुर में 167 और महोबा में 152 यूनिट स्थापित की गईं। इसमें भी पशु चिकित्साधिकारियों ने जमकर खेल किया। जिनके पास पहले से बकरियां थीं, उन्हीं को लाभार्थी बनाया।

बांदा में 91, हमीरपुर में 56, महोबा में 63 और चित्रकूट में 43 लाभार्थियों को बीमा कंपनी ने बकरियां मरने पर क्लेम दिया है। डॉ.जेएस सामरा के नेतृत्व में आई केंद्रीय टीम ने लाभार्थियों से मिलकर जांच भी की थी। इसमें भी गड़बड़ी पाई गई थी।  

बकरियों की खरीद डीएम व सीडीओ द्वारा भेजे गए प्रतिनिधियों की देखरेख में हुई है। बकरियों के भाव बढ़ गए हैं। इसलिए 12 माह से ऊपर की बकरी के लिए बजट पर्याप्त नहीं था। ऐसे में कुछ कम उम्र की बकरियां खरीदी गई हैं। बजट पिछली योजना के मुताबिक मिला है, जबकि बकरियों के भाव बढ़ गए हैं। बकरियों के लिए दवाएं भी दी गई हैं। दाना खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
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-डॉ. लाखन सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा।
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