बांदा। टेक होम राशन (टीएचआर) प्लांटों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है।
बीएमएम और डीएमएम का काम प्लांटों की निगरानी करना है, लेकिन बांदा में व्यवस्था इसके उलट होने के आरोप लगे हैं। समूह की महिलाओं का दावा है कि प्लांटों में राशन की खरीद से लेकर पोषाहार तैयार कराने और उसकी आपूर्ति तक में ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम) और जिला मिशन मैनेजर (डीएमएम) का हस्तक्षेप रहता है। शिकायतें अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।
इन शिकायतों को लेकर डीएम को लिखित प्रार्थनापत्र दिया गया है। समूह की एक महिला ने बताया कि राशन खरीदने के दौरान समूह के पदाधिकारियों से खाली चेक पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। इसके बाद खरीद की प्रक्रिया और सामान की मात्रा तय करने में समूह की महिलाओं की भूमिका सीमित रह जाती है। आरोप है कि प्लांट के संचालन और तैयार पोषाहार को भेजने तक के काम में भी बीएमएम-डीएमएम अपनी मर्जी चलाते हैं।
महिलाओं का कहना है कि समूह को संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने के बावजूद कामकाज में उनका अधिकार प्रभावी नहीं रह गया है। काम के लिए समूह की महिलाओं के बजाय अलग से कर्मचारियों को लगाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
महिलाओं की शिकायतें सामने आने से पहले प्लांटों में चल रही कथित गड़बड़ियों का मामला सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया था। क्षेत्रीय उप जिलाधिकारियों के निरीक्षण में प्लांटों की व्यवस्थाओं में खामियां सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद समूह की महिलाओं ने भी अपनी शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचाईं।
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डीएम के आदेश के बाद भी दो माह तक घूमती रही फाइल
टीएचआर प्लांटों में गड़बड़ियों की शिकायतों और क्षेत्रीय उप जिलाधिकारियों के निरीक्षण के बाद डीएम ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने में करीब दो माह लग गए। इस दौरान संबंधित लोगों से जवाब लेने तक ही मामला सीमित रहने के आरोप हैं।
अमर उजाला में मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद डीएमएम शालिनी जैन, बबेरू के बीएमएम दीनबंधु, नरैनी के बीएमएम अखिलेश और बड़ोखर के बीएमएम राकेश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई के लिए मिशन निदेशक को पत्र भेजा गया। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मिशन निदेशक स्तर से शिकायतों और निरीक्षण में सामने आई खामियों पर क्या कार्रवाई होती है।