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Banda News: ब्लास्टिंग से 12 मकानों और विद्यालय में दरारें, पेयजल बोर धंसे

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फोटो-12- अपने घर की दीवार में पड़ी दरार को दिखाता रतीराम। संवाद
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करतल (बांदा)। नरैनी तहसील की ग्राम पंचायत नहरी के मजरा काछिन पुरवा में पहाड़ पर हो रही ब्लास्टिंग ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि धमाकों से 12 मकानों और प्राथमिक विद्यालय की दीवारों में दरारें आ गई हैं। दो पेयजल बोर भी धंस गए हैं। इससे ग्रामीण अपने मकानों और परिवार की सुरक्षा को लेकर दहशत में हैं। उनका कहना है कि हालात नहीं सुधरे तो उन्हें गांव छोड़कर मध्य प्रदेश की ओर पलायन करना पड़ेगा।
काछिन पुरवा निवासी रतीराम, कल्लू, देशराज, बच्चू राम, अवतार और मंगल सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी नरैनी से शिकायत कर मकानों और परिवारों की सुरक्षा की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव से सटे पहाड़ पर प्रतिदिन दोपहर एक बजे ब्लास्टिंग की जाती है। धमाके इतने तेज होते हैं कि घरों के दरवाजे तक हिलने लगते हैं।
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आरोप है कि पहाड़ में 50 से 100 फीट तक गहरे छेद करके विस्फोट किए जा रहे हैं। इससे मकानों में दरारें आ रही हैं। अब दो पेयजल बोर भी धंस गए हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि इसी तरह धमाके होते रहे तो उनके लिए गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से ब्लास्टिंग की जांच कराने और सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से काछिन पुरवा के प्राथमिक विद्यालय की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं। ऐसे में विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। नहरी पंचायत की गोशाला में धमाकों के दौरान गोवंश में भगदड़ मच जाती है। इससे बच्चों, परिवारों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों के घर पहाड़ से करीब 350 से 400 मीटर की दूरी पर हैं। प्राथमिक विद्यालय भी इतनी ही दूरी पर स्थित है।
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अचानक धमाके से सब कुछ हो जाता है सुन्न
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ पर रोजाना करीब एक बजे ब्लास्टिंग की जाती है। उस समय गांव के लोग अपने दैनिक कार्यों में लगे रहते हैं। कोई खाना खा रहा होता है तो कोई खेत-खलिहान में काम कर रहा होता है। इसी बीच अचानक तेज धमाका होता है। ऐसा लगता है, जैसे भूकंप आ गया हो। घरों के दरवाजे खड़खड़ाने लगते हैं और कुछ देर तक सुनाई देना बंद हो जाता है। धमाके के बाद दिल और दिमाग एकदम स्तब्ध रह जाते हैं। आरोप है कि रोजाना होने वाले इन धमाकों से बीमार लोगों को भी परेशानी होती है।
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जांच के बाद भी नहीं मिली राहत
जिला खान अधिकारी राज रंजन ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर और खनिज निरीक्षक की संयुक्त टीम से जांच कराई गई थी। जांच में पहाड़ के करीब बने मकानों में कंपन नहीं पाया गया था। वहीं, पहाड़ से दूर बने कुछ मकानों में दरारें पड़ने की बात सामने आई थी।
उन्होंने बताया कि खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ब्लास्टिंग से संबंधित मानक तय करता है। उसके मुताबिक, ब्लास्टिंग के लिए 20 फीट से अधिक गहराई नहीं होनी चाहिए। खनिज अधिकारी ने कहा कि पहाड़ संचालकों से बात कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

दो साल से प्रभावित है 1300 की आबादी
करतल। काछिन पुरवा की करीब 1300 की आबादी पिछले दो सालों से धमाके का दंश झेल रही है। पुरवा में करीब 200 मकान बने हुए हैं और यहां की आबादी करीब 1300 के करीब है।
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ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2024 से पहाड़ पर ब्लास्टिंग की प्रक्रिया शुरू की गई थी। शुरूआत में नियमों के तहत धमाके हो रहे थे। इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं थी। अब मानक के विपरीत जाकर अधिक गहराई से अच्छी गुणवत्ता का पत्थर निकालने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है। इसका असर ग्रामीणों के घर व दिनचर्या पर हो रहा है। इसलिए सभी परेशान हैं। (संवाद)

फोटो-12- अपने घर की दीवार में पड़ी दरार को दिखाता रतीराम। संवाद

फोटो-12- अपने घर की दीवार में पड़ी दरार को दिखाता रतीराम। संवाद

फोटो-12- अपने घर की दीवार में पड़ी दरार को दिखाता रतीराम। संवाद

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