बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में भाजपा को तगड़ा झटका लगा
है। बांदा-हमीरपुर विधान परिषद सीट से अधिकृत प्रत्याशी ने अचानक नाम वापस
ले लिया। दो अन्य निर्दलियों ने भी नाम वापस ले लिया। इस कारण सपा
प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं।
भाजपा ने आनंद कुमार
त्रिपाठी उर्फ बब्बू को अपना प्रत्याशी बनाया था। मंगलवार को भाजपाइयों ने
लाव-लश्कर और वाहनों के काफिले के साथ उनका नामांकन कराया।
इससे लग
रहा था कि सपा प्रत्याशी को भाजपा तगड़ी टक्कर देगी। चुनाव प्रचार भी शुरू
हो गया था, लेकिन बृहस्पतिवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में भाजपा
प्रत्याशी ने बेहद गुपचुप ढंग से अपना नाम वापस ले लिया।
आज ही नाम
वापसी की तिथि थी। दोपहर करीब 1:25 बजे भाजपा प्रत्याशी एक कांग्रेसी नेता
के वाहन पर गुपचुप ढंग से कलेक्ट्रेट आए। उनके साथ भाजपा सांसद भैरो
प्रसाद मिश्र के भाई और पूर्व विधायक दिनेश मिश्रा भी थे।
आनंद
त्रिपाठी ने उप जिला निर्वाचन अधिकारी/एडीएम डीएस पांडेय के समक्ष नाम
वापसी की अर्जी दी। एडीएम ने इसे स्वीकार कर लिया। इसके पूर्व दो अन्य
निर्दलीय प्रत्याशी आशीष कुमार और आदेश कुमार (हमीरपुर) ने भी नाम वापस ले
लिए।
भाजपा प्रत्याशी के नाम वापस लेने के कुछ ही देर बाद सपा
प्रत्याशी रमेश मिश्रा कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ जिलाध्यक्ष शमीम
बांदवी, पूर्व अध्यक्ष इमरान अली व इम्तियाज खां, उपाध्यक्ष अशोक सिंह गौर,
रामकरन बच्चन, पीयूष गुप्ता, राजेंद्र यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष
महेंद्र सिंह वर्मा, मनोज निगम लाला भी थे।
सपाइयों ने अपने
प्रत्याशी को फूलों की माला से लाद दिया। डीएम सुरेश कुमार ने सपा
प्रत्याशी के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा करते हुए निर्वाचित होने
का प्रमाणपत्र भी सौंप दिया।
ठेकेदार थे, इसलिए दबाव में आ गए
बांदा।
प्रत्याशी द्वारा की गई किरकिरी पर भाजपा नेता हैरत में हैं। साथ ही इनमें
गुस्सा भी है। कुछ भाजपा नेता तो दबी जुबान पार्टी हाईकमान को कोस रहे
हैं। कुछ का कहना है कि उनके प्रत्याशी पर शासन और प्रशासन का तगड़ा दबाव
पड़ा। प्रत्याशी ठेकेदारी भी करते थे।
ऐसे में उन पर दबाव बनाना
आसान हो गया। भाजपा प्रत्याशी आनंद कुमार त्रिपाठी के नाम वापस लेने की भनक
पार्टी नेताओं को भी नहीं लगी। जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल का कहना है
कि इससे पार्टी की साख पर बट्टा लगा है। सत्ता के दबाव में नाम वापस ले
लिया। किसी को सूचना नहीं दी।
पूर्व जिलाध्यक्ष बाल मुकुंद शुक्ला
ने कहा कि आनंद त्रिपाठी भाजपा में नए आए थे। ये व्यवसायिक और गैर राजनीतिक
व्यक्ति थे। शायद शासन-प्रशासन ने उनके कामों की जांच भी शुरू करा दी थी।
इसी से वह डर गए। पूर्व
अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे धोखेबाजों को पार्टी
से निकाल बाहर किया जाएगा। कमजोर प्रत्याशी के चयन में चूक कहां हुई? पर
पूर्व अध्यक्ष का कहना था कि कई लोगों ने टिकट मांगा था। हाईकमान ने ठोंक
बजाकर और स्थानीय नेताओें की सलाह पर टिकट दिया था।
सपा में रहे हैं तो लगाव होगा ही
बांदा।
निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद सपा खेमे मेें जश्न का माहौल है। सपा
नेताओं में इसकी क्रेडिट लेने की होड़ है। निर्वाचित होने का प्रमाणपत्र
हासिल करने के बाद सपा प्रत्याशी रमेश मिश्रा ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी का
नाम वापस लेना सपा की बढ़ती लोकप्रियता का जीता-जागता सुबूत है।
उन्होंने कहा है कि भाजपा प्रत्याशी आनंद त्रिपाठी पहले सपा में ही रहे हैं, इसलिए उनका सपा से लगाव होना अप्रत्याशित नहीं।
पिछला चुनाव सपा से ही लड़े थे आनंद त्रिपाठी
बांदा।
ऐन मौके पर भाजपा को गच्चा देकर अप्रत्याशित ढंग से सपा को फायदा पहुंचाने
वाले आनंद कुमार त्रिपाठी सपा के लिए नए नहीं हैं। वर्ष 2009 में हुए इसी
चुनाव में वे सपा प्रत्याशी थे। सपाई तो यहां तक बता रहे हैं कि इस बार भी
उन्होंने सपा से टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिला।
इसी के बाद
भाजपा से टिकट लिया। सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष इमरान अली राजू ने बताया
कि वर्ष 2009 के विधान परिषद चुनाव में अन्य कोई मजबूत प्रत्याशी न मिलने
पर आनंद कुमार त्रिपाठी को ही टिकट दे दिया था।