ठंड और कोहरे के मौसम में भी कई गांवोें में पेयजल
संकट है। यहां के लोग दूर बह रही नदी का कड़वा पानी लाकर प्यास बुझा रहे
हैं। कड़ाके की ठंड में मासूम बच्चे और महिलाएं कई किलोमीटर से सिरों पर
पानी ला रहे हैं। यहां हैंडपंप के वादे हर चुनाव में नेता करते हैं, बाद
में इस तरफ मुड़कर कोई नहीं देखता।
दस्यु प्रभावित क्षेत्र के बघोलन
गांव में पीने के पानी का संकट है। गर्मियों में तो पानी की मारामारी होती
ही है। ठंड में भी पानी का अकाल है। मइयादीन पटेल, गुजरतिया, उमा देवी,
लाला गुप्ता, पवन, संगीता, सावित्री ने बताया कि वह दो किमी दूर कड़ैली नदी
से पानी लाकर अपनी और मवेशियों की प्यास बुझाते हैं।
नदी का पानी
प्रदूषित होने से बीमारी का खतरा है। दस साल से वे इसी तरह जिंदगी बसर कर
रहे हैं। तड़के ही परिवार की महिलाएं और बच्चे बर्तन लेकर नदी की ओर कूच कर
जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप की मांग लंबे अरसे से की जा
रही है।
चुनाव के दौरान नेता और जनप्रतिनिधि हर बार वादा कर जाते
हैं, फिर मुड़कर नहीं देखते। मइयादीन पटेल ने रोष जताते हुए कहा कि अब किसी
भी चुनाव में यहां के ग्रामीण वोट नहीं डालेंगे।