बांदा। कड़ाके की ठंड में रात को खेतों में पानी लगाने की मिल रही खबरों पर पावर कार्पोरेशन (ट्रांसमिशन) के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली दी जा रही है। ऐसे में रात को पानी लगाने का क्या औचित्य? उनका यह भी दावा है कि वोल्टेज भी पर्याप्त दिया जा रहा है। अगर कहीं वोल्टेज की समस्या है तो उन्हें बताएं।
शीतलहर के दौरान रात को खेतों में पानी लगाने और ठंड की चपेट में आने की खबरों पर चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा में स्थित 220 केवी सब स्टेशन के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा का कहना है कि शहरों को 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे आपूर्ति की जा रही है। तहसील मुख्यालयों में साढ़े 22 घंटे बिजली दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में दो चरणों में 2-2 घंटे कटौती हो रही है। कटौती का समय 23.45 से तड़के 1.45 और 16 बजे से 18 बजे तक निर्धारित है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि उनके सब स्टेशन से 33 केवी सब लाइनों को पर्याप्त वोल्टेज 220 से 240 वोल्ट दिए जा रहे हैं।
अधिशासी अभियंता ने कहा कि अगर कहीं वोल्टेज समस्या है तो वहां किसान/उपभोक्ता अवगत कराएं। सब स्टेशन से वोल्टेज और बढ़ाया जा सकता है। अलबत्ता वितरण खंड (डिस्ट्रीब्यूशन) की लाइनों पर अतिरिक्त लोड आदि है तो संबंधित विभाग को अवगत कराएं।
नलकूप धारक किसान बोले- 11 से 14 घंटे ही बिजली
बांदा। पावर कार्पोरेशन अभियंता जहां ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ ग्रामीण 11 से 14 घंटे ही बिजली मिलने की बात कह रहे हैं। फतेहगंज क्षेत्र के जरकढ़ा गांव निवासी किसान राजाराम गर्ग ने बताया कि 11 घंटे ही बिजली मिलती है। इसी में वह ट्यूबवेल चलाते हैं। इसी तरह बिसंडा के किसान शिवचरण तिवारी ने 13 घंटे बिजली मिलने की बात कही। उधर, नरैनी क्षेत्र के लहुरेटा गांव निवासी किसान मुनीर और लोधिन पुरवा के मइयादीन राजपूत ने कहा कि रात में 8 घंटे और दिन में 6 घंटे ही बिजली मिलती है। दोनों नलकूप वाले किसानों ने कहा कि अधिकांश 8 घंटे ही बिजली मिल पाती है।