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बकस्वाहा पहुंची साइकिल यात्रा

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Bicycle tour reached Bakswaha - फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को हीरा खदान में तब्दील करने से बचाने के लिए चल रहे आंदोलनों की श्रंखला में पांच दिवसीय साइकिल यात्रा का बकस्वाहा में समापन हुआ। साइकिल यात्री और पर्यावरण पैरोकारों ने यहां पौध रोपे। पूरे मार्ग में यात्रियों का जगह-जगह स्वागत हुआ।
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26 जुलाई को साइकिल यात्रा मध्यप्रदेश के छतरपुर से शुरू हुई थी। इसका नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर (छतरपुर) और शरद कुमरे (भोेपाल) कर रहे थे। साइकिल यात्रियों ने बताया कि एक तरफ जहां जगह-जगह आम लोगों ने उनकी अगुवानी की, वहीं हीरा खनन कंपनी के गुर्गों ने उनकी यात्रा में बाधा पैदा करने की कोशिश की। स्थानीय प्रशासन ने भी सहयोग नहीं दिया, लेकिन साइकिल यात्रियों के हौसले में कोई कमी नहीं आई।
साइकिल यात्रा टीम में राजेश यादव, चंदन यादव, नीशू मालवीय, बीनू बघेल, सुनीता कलमे, आयुष रावत आदि शामिल रहे। साइकिल यात्रियों ने बताया कि आगे की रणनीति पर यात्रा के दौरान लोगों से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि एएसआई टीम ने शैल चित्रों के जिन स्थानों को अपने सर्वे में शामिल नहीं किया है उन्हें भी शामिल किया जाए। यह सर्वे सिर्फ औपचारिकता था।
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बिहार से चली साइकिल यात्रा प्रयागराज पहुंची
बांदा। बकस्वाहा बचाने का संकल्प लेकर एक और साइकिल यात्रा निकल पड़ी है। यह बिहार के मुजफ्फरपुर से शुरू हुई है। बकस्वाहा तक जाएगी। पीपल, नीम, तुलसी अभियान के तत्वावधान में इस साइकिल यात्रा का नेतृत्व बनारस हिंदू विवि के छात्र और अभियान सदस्य सिद्धार्थ झा तथा राजीव कुमार कर रहे हैं। शुक्रवार की रात यह यात्रा प्रयागराज पहुंची। यहां दोनों छात्रों का पर्यावरण प्रेमियों ने जोरदार स्वागत किया। साइकिल यात्री चित्रकूट के लिए रवाना हुए। राष्ट्रीय जल बिरादरी प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के संयोजक जल योद्धा आर्य शेखर ने दोनों का स्वागत किया। (संवाद)
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