हादसे की खबर पर बोगी से उतरकर नीचे आ गए रेल यात्री।
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रेल यात्रियों की सूझबूझ से बेतवा एक्सप्रेस में सवार सैकड़ों जिंदगियां बच गईं। बिसाहिल नाला पुल पर बड़ा हादसा टल गया। लोहे की चादर पहियों के बीच फंस जाने से ट्रेन पटरी से नीचे उतरते बची। चालक व गार्ड की सूचना पर बांदा से आधा सैकड़ा रेल कर्मियों की फौज मौके पर पहुंची और ट्रेन के ब्रेक एसेंबल बदले और पटरियां दुरुस्त कीं। लगभग दो घंटे बाद ट्रेन दुर्ग (छत्तीसगढ़) के लिए रवाना हो सकी।
सोमवार रात अतर्रा से 10:24 बजे कानपुर से दुर्ग के लिए बेतवा एक्सप्रेस रवाना हुई। लगभग 10 मिनट बाद बदौसा रेलवे स्टेशन आना था। लेकिन एक किलोमीटर पूर्व आउटर सिग्नल के नजदीक बिसाहिल नाला पुल पर बिछी लोहे की मोटी चादर ट्रेन के एसी कोच बी-वन के नीचे पहियों के बीच फंस गई। ट्रेन की रफ्तार तेज होने पर लोहे की चादर की रगड़ और तेज चिंगारी ने लगभग 500 मीटर दूर तक पटरियों के नट-बोल्ट व चाबियां उखाड़ दीं। पटरियां भी फैल गईं। तेज झटकों से एसी कोच के यात्री की नींद खुल गई और अफरा-तफरी मच गई।
ट्रेन के पटरी से नीचे उतरने की आशंका पर यात्रियों ने चेन खींचकर रेल रोकने की कोशिश की। कुछ ही दूर जाकर ट्रेन रुक गई। चालक बोगी का प्रेशर दुरुस्त करने आया तो नजारा देख चेहरे की रंगत उड़ गई। उसने सीनियर चालक व गार्ड को इसकी जानकारी दी। गार्ड ने तुरंत बदौसा और बांदा स्टेशन प्रबंधक को हादसे की सूचना दी।
सहायक मंडल अभियंता, चित्रकूट के नेतृत्व में टीआई, एलआई व पीडब्ल्यूआई विभागों के अभियंता व गैंगमैन व चाबीमैनों की फौज दुर्घटना यान से मौके पर पहुंची। पहले एसी बोगी की मरम्मत कर ट्रेन को रवाना किया गया। इसके बाद फैली पटरियों को दुरुस्त कर चाबियां कसी गईं। लगभग दो घंटे बाद मानिकपुर रूट बहाल हो सका।
रूट प्रभावित होने से घंटों लेट हुईं ट्रेनें
कई सुपरफास्ट व पैसेंजर ट्रेनें स्टेशनों में घंटों खड़ी रहीं। जबलपुर से निजामुद्दीन जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस को चित्रकूट और लखनऊ से जबलपुर की तरफ जा रही चित्रकूट एक्सप्रेस को अतर्रा स्टेशन पर रोके रखा गया। इसके अलावा झांसी-मानिकपुर पैसेंजर ट्रेन को बांदा स्टेशन पर रोकना पड़ा। हादसे की वजह से समय पर चल रही ट्रेनें भी घंटों लेट हो गईं।