पंजाब में खेती और उत्पादन पर मॉनसून का असर
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बांदा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को एक बार फिर छलने और छकाने की तैयारी है। पिछली फसलों का बीमा क्लेम अब तक नहीं आया है। भारी तादाद में किसान बैंकों, कृषि विभाग तथा बीमा एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। इस वर्ष की बात करें तो लगातार बारिश के चलते खरीफ की बुआई भी नहीं हुई है और बीमा एजेंसी ने बीमा की अंतिम तिथि समाप्त कर दी है। मंगलवार को यह मुद्दा लोकसभा में गूंजा। सांसद भैंरो प्रसाद मिश्र ने शून्यकाल के दौरान सरकार से अनुरोध किया कि फसल बीमा योजना का समय 31 अगस्त तक किया जाए।
लगभग सभी किसानों की बीमा किश्त बैंकों ने काट ली थी। यहां तक कि सूखा पीड़ित किसानों को मिले कृषि निवेश अनुदान से भी बैंक बीमा राशि काटने से नहीं चूके। बीमा क्लेम सिर्फ गिने-चुने किसानों को ही मिला। इस वर्ष प्रदेश सरकार ने भी बीमा कंपनी नामित कर दी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल बीमा के लिए 31 जुलाई निर्धारित की गई थी। जबकि जुलाई में लगातार बारिश से खेतों में जुताई-बुआई की नौबत ही नहीं आई। ऐसे में किसान बीमा क्या कराते? मंगलवार को सांसद भैंरो प्रसाद मिश्र ने शून्य काल के दौरान लोकसभा में बुंदेलखंड की मौजूदा और पूर्व की परिस्थितियों का हवाला देकर केंद्र सरकार से कहा कि प्रदेश सरकार ने जुलाई के दूसरे हफ्ते में बीमा एजेंसी घोषित की। मात्र एक पखवारे के बाद 31 जुलाई को बीमा एजेंसी ने बीमे की अवधि समाप्त कर दी। जबकि लगातार हो रही बारिश और बाढ़ आदि से किसान दलहन और मोटे अनाजों की बुआई नहीं कर पाए हैं। सांसद ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इन परिस्थितियों के मद्देनजर फसल बीमा योजना का समय बढ़ाकर 31 अगस्त किया जाए। फिलहाल केंद्र सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं दर्शाया है।