भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने किसानों और मजदूरों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन करते हुए बंद कताई मिल और बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री चालू करने की मांग की। नोटबंदी से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की भी मांग की गई।
शुक्रवार को स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट में धरने को संबोधित करते हुए कताई मिल मजदूर मोर्चा अध्यक्ष राम प्रवेश यादव ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की गलतियों से बुंदेलखंड की कताई मिल और बरगढ़ ग्लास फैक्टरी बंद पड़ी है। किसी सरकार ने इसे चालू कराने की सुध नहीं ली। निर्माण मजदूर यूनियन अध्यक्ष राजबहादुर वर्मा ने कहा कि नोटबंदी से बुंदेलखंड का किसान तबाह हो गया।
ज्यादातर किसान खेतीबारी छोड़कर खाद, बीज, पानी और अन्य जरूरतों के लिए बैंकों के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने नोटबंदी से परेशान सभी गरीबों को एक लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग की। अखिल भारतीय ग्रामीण खेत मजदूर सभा जिला संयोजक भगवती प्रसाद ने कहा कि बंद कताई मिल और बरगढ़ ग्लास फैक्टरी को चालू कर दिया जाए तो बेरोजगारी और किसान आत्महत्या व पलायन रुक जाएगा।
प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित 10 सूत्री ज्ञापन एडीएम गंगाराम गुप्ता को सौंपा। इसमें किसानों, मजदूरों के सभी कर्ज माफ, गरीबों को दो रुपये की दर से 50 किलो गेहूं-चावल, बेरोजगारों को रोजगार, मनरेगा में 300 दिन काम या बेरोजगारी भत्ता दिलाने समेत अन्य मांगे शामिल हैं। ज्ञापन देने वालों में किशोरीलाल, लल्लू, राजबहादुर अनुरागी, बब्बू, सैखू प्रसाद, कुसुमा वर्मा, शांति, चुन्नू, बादल, लक्ष्मण प्रसाद प्रजापति, बिंदू प्रजापति, शिवराम और राममिलन वर्मा समेत तमाम मजदूर मौजूद रहे।