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‘गुडविल’ में लोन देने से बैंकों का इनकार

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बांदा। बैंकों से अरबों-खरबों का कर्ज लेकर चलते बने विजय माल्या जैसे कई चर्चित चेहरों की चर्चाओं के बीच बैंकों ने स्पष्ट किया है कि वह किसी को उसकी ‘गुडविल’ या अन्य तरह के प्रभावों से प्रभावित होकर कर्ज स्वीकृत नहीं करते। बैंकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि लोन प्रक्रिया बैंक के बोर्ड द्वारा अनुमोदित पॉलिसी के मुताबिक होती है।
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भारी भरकम कर्ज लेकर देश से फरार हो जाने वाले विजय माल्या जैसे कई नाम सुर्खियों में हैं। उधर, मामूली कर्ज अदा न कर पाने पर बैंकों के उत्पीड़न से डरे सहमे तमाम किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं। इसी बीच आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला ने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय से जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी थी कि लोन स्वीकृत करने, जमानत/प्रतिभूति की क्या प्रक्रिया है?
यह भी पूछा था कि गुडविल या अन्य तरह के प्रभावों से प्रभावित होकर क्या लोन स्वीकृत किए जाते हैं? साथ ही ऋणों की वसूली के लिए बैंक क्या बड़े कदम उठाते हैं? इस पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों के मुख्य जन सूचना अधिकारियों को यह सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश पिछले माह जारी किए थे। इसके अनुपालन में विभिन्न बैंकों के जन सूचना अधिकारियों ने निम्नांकित सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं।
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पंजाब एंड सिंध बैंक : दिल्ली स्थित मुख्यालय द्वारा दिए गए जवाब में कहा है कि लोन गुडविल या अन्य प्रभावों से स्वीकृत नहीं होते। आरबीआई द्वारा जारी मानदंड और दिशा-निर्देश अमल में लाए जाते हैं। वसूली भी आरबीआई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक होती है।
भारतीय स्टेट बैंक : निर्धारित प्रक्रिया में आवेदन करके किसी भी क्रेडिट सुविधा का लाभ लिया जा सकता है। प्रतिभूति या तीसरे पक्ष की गारंटी के आधार पर ऋण को मंजूरी दी जा सकती है। सद्भावना या अमूर्त संपत्ति के आधार पर कोई क्रेडिट सुविधा नहीं दी जाती। बकाया वसूलने के लिए बैंक कई तरीके अपनाता है। इनमें नोटिस के अलावा उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटाया जाता है। धनराशि में हेराफेरी मिलती है तो प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज होती है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया : केंद्रीय जन सूचना अधिकारी केसी चौधरी (नई दिल्ली) ने कहा है कि हरेक लोन की प्रतिभूति अलग-अलग होती है। बैंक की पॉलिसी के अनुसार प्रतिभूति ली जाती है। बैंक बोर्ड द्वारा अनुमोदित पॉलिसी के मुताबिक लोन स्वीकृत किए जाते हैं। एनपीए खातों की वसूली के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं। जैसे अदालती प्रक्रिया, आईबीसी के अंतर्गत कार्रवाई आदि।
उपरोक्त बैंकों के अलावा कई अन्य बैंकों ने मांगी गई यह जन सूचना देने से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया या हाथ खड़े कर दिए कि मांगी गईं सूचनाएं स्पष्ट नहीं हैं, ये आरटीआई के दायरे में नहीं आतीं इत्यादि। ऐसे बैंकों में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक, सिंडीकेट बैंक आदि शामिल हैं।
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