बांदा। 500 और हजार के नोट चलन से बाहर होने के बाद गुरुवार को बैंक खुले तो रिकार्ड लेन-देन हुआ। हर बैंक में पैसा जमा करने के सारे रिकार्ड टूट गए। बैंकों द्वारा किए गए विशेष इंतजाम भी नाकाफी साबित हुए। महिलाओं और बूढ़ों को धक्के सहना पड़े।
कचहरी स्थित स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में सबसे ज्यादा भीड़ रही। लेन-देन भी सर्वाधिक हुआ, लेकिन बैंक प्रबंधन ने सिर्फ एक अतिरिक्त काउंटर खोला। जबकि बैंक मुख्यालय से जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त काउंटर बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे।
शाखा प्रबंधक सिद्धेश कुमार श्रीवास्तव का कहना था कि जितना स्टाफ है उतना काम है। रामलीला रोड स्थित सिटी ब्रांच में बाहर तक लाइन रही। यहां जमा करने के लिए दो काउंटर बनाए गए थे।
मैनेजर विजय कुमार शर्मा ने बताया कि दो बजे के बाद निकासी शुरू हुई। अमर टाकीज रोड पर स्थित स्टेट बैंक की एक अन्य शाखा में पांच काउंटरों से जमा और निकासी हुई। एक्सिस बैंक में जमा करने के साथ नई करेंसी का 2000 का नोट भी दिया गया। बैंक के आपरेशन मैनेजर इरशाद बेग ने बताया कि नई करेंसी के नोटों में सिर्फ 2000 के नोट ही आए हैं। यह दिए जा रहे हैं।
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की विकास भवन शाखा में भी दो काउंटर बना कर पुराने नोट जमा कराए गए। यहां किसी को भुगतान नहीं किया गया। ब्रांच मैनेजर एसके सिंह ने कहा कि शुक्रवार से भुगतान होगा। बैंक आफ बड़ौदा में प्रबंधक संतोष वर्मा ने बताया कि पुराने नोट इतने जमा हुए कि रखने की जगह कम पड़ गई। यहां दो काउंटर ही चलते रहे। पंजाब नेशनल बैंक में पांच काउंटरों पर लेन-देन हुआ।
केनरा बैंक (स्टेशन रोड) में दो बजे ही कैश खत्म हो गया। सिर्फ पुराने नोट जमा हुए। प्रबंधक सुनील कुमार ने बताया कि छोटे नोटों की पहले से ही कमी है। प्रधान डाक घर में भी जमा और निकासी सुबह से देर शाम तक चली। उप मंडलीय निरीक्षक नत्थू सिंह ने बताया कि निकासी के लिए बनाए गए काउंटरों में देर रात तक भुगतान किए गए।
बांदा। डीजीपी द्वारा जारी निर्देशों और गृह मंत्रालय द्वारा किए गए एलर्ट के मद्देनजर गुरुवार को बैंकों में पुलिस अधीक्षक डा.श्रीपति मिश्र ने खुद निरीक्षण किया। बैंकों की व्यवस्थाएं देखी और पुलिस के पहरे का जायजा लिया। उनके साथ क्षेत्राधिकारी डॉ. राकेश कुमार मिश्रा भी थे।