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खेत से उठा ले गए बैंक वाले ट्रैक्टर

Thu, 16 Mar 2017 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा
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बांदा। सत्ता में आने पर मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में किसानों के कर्ज माफ करने का वादा करने वाली भाजपा सरकार के आते ही बैंकों ने कर्जदार किसानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। दलित किसान को नोटिस जारी करने के बाद बैंक का एजेंट बलपूर्वक किसान का अनाज से भरा ट्रैक्टर और ट्राली खेत से उठा ले गया। किसान के वृद्ध पिता के साथ मारपीट का भी आरोप है। जिलाधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।मामला बबेरू तहसील के मरका थानातंर्गत इंगुवा गांव का है। यहां के दलित शिवबरन पुत्र चुन्ना रैदास द्वारा जिलाधिकारी को दिए शिकायतीपत्र में बताया कि उसने स्टेट बैंक आफ इंडिया की अतर्रा ब्रांच से खेती के लिए 3 लाख 95 हजार रुपये कर्ज लेकर ट्रैक्टर लिया था। इसमें उसने दो लाख 80 हजार रुपये जमा कर दिए हैं। इस बीच कई वर्षों से दैवी आपदा से फसलें नहीं हो पा रही हैं जिससे बैंक की किश्तें अदा नहीं हो पाईं। किसान ने बताया कि आर्थिक स्थिति इतनी गड़बड़ा गई है कि खाने के लाले हैं।
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किसान ने कहा है कि बैंक कुछ दबंग एजेंटों के जरिए उसे पैसा अदायगी के लिए धौंस-धमकी दिलवा रहा है। 10 मार्च को वह खेत में फसल काट रहा था। कटी हुई फसल से भरी ट्राली और ट्रैक्टर खेत में खड़े थे। तभी कुछ अज्ञात लोग आ धमके। इनमें कुछ पुलिस की वर्दी पहने थे। फसल भरा ट्रैक्टर ले जाने लगे। मना करने पर उसके वृद्ध माता-पिता के साथ मारपीट की। बैंक प्रबंधक के निर्देशों का हवाला देकर बैंक का नोटिस भी उसे थमा दिया। किसान ने आरोप लगाया कि ट्रैक्टर छोड़ने के बदले में फोन पर कॉल करके डेढ़ लाख रुपये मांगे। इस आतंक से सहम कर उसके माता-पिता बीमार पड़ गए। दो दिनों बाद सिर्फ ट्राली पड़ोसी गांव मऊ में लावारिस अवस्था में पाई गई। ट्रैक्टर नहीं वापस किया गया। दलित पीड़ित किसान की पैरवी कर रहे स्वयंसेवी संगठन सबेरा ट्रस्ट के अरविंद सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने किसानों के उत्पीड़न पर रोक लगा रखी है। फिर भी बैंक बाज नहीं आ रहे। उन्होंने कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र पर जिलाधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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