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Banda News: उपग्रहों से मापा जाएगा बांदा का तापमान, रिमोट सेंसिंग तकनीक बताएगी सच

Fri, 19 Jun 2026 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो - 28 डीएम अमित आसेरी।
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बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और बांदा जिला इसका सबसे बड़ा गवाह बन रहा है। पारा अक्सर 48 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने गर्मी और लू के पीछे के असली वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि शासन ने छह वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम को बांदा भेजा है।
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यह वैज्ञानिक टीम आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक, उपग्रह चित्रों और व्यापक वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग करके यह पता लगाएंगी कि बांदा में लू का प्रभाव इतना अधिक क्यों है। वैज्ञानिकों का दल जिले के विभिन्न क्षेत्रों का गहन अध्ययन करेगा, जिसमें उन सभी कारकों की जांच की जाएगी जो तापमान को बढ़ाते हैं।



अध्ययन के प्रमुख बिंदु



वैज्ञानिकों द्वारा किए जाने वाले सर्वे में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:


जमीन की सतह का तापमान : उपग्रहों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर यह निर्धारित किया जाएगा कि बांदा के किन क्षेत्रों में जमीन सबसे अधिक गर्म हो रही है।



हरियाली और वन क्षेत्र की स्थिति : पेड़ों की संख्या, वन क्षेत्र में आए बदलाव और हरियाली की कमी का तापमान पर पड़ने वाले असर को देखा जाएगा।



जल स्रोतों की भूमिका : जिले में मौजूद तालाबों, नदियों, जलभराव वाले क्षेत्रों और भूजल की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। यह समझा जाएगा कि नमी की कमी गर्मी के प्रभाव को कैसे बढ़ाती है।
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भौगोलिक कारण : बुंदेलखंड की विशिष्ट चट्टानी भूमि, कम नमी, खुला भूभाग और गर्म हवाओं की दिशा जैसे स्थानीय भौगोलिक कारकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।



मानवीय गतिविधियों का असर : सड़कों, कंक्रीट के निर्माण, धूल, निर्माण कार्यों और अन्य मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले हीट आइलैंड प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा।



परिस्थितियां और मौसम का संगम



वैज्ञानिकों का यह भी पता लगाना है कि बांदा में तापमान में वृद्धि केवल मौसमी बदलावों के कारण हो रही है या स्थानीय परिस्थितियां इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रही हैं। इसके लिए, विभिन्न मौसमों के आंकड़े, पुराने तापमान रिकॉर्ड और वर्तमान उपग्रह डेटा को मिलाकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।



यह वैज्ञानिक अध्ययन न केवल बांदा के लिए, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक उपयोगी मॉडल साबित हो सकता है। इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष जिला प्रशासन को हीट एक्शन प्लान बनाने, अधिक से अधिक पौधरोपण करने, जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाने, छायादार क्षेत्रों के विकास और गर्मी से बचाव के लिए ठोस योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेंगे।



जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि इस अध्ययन के लिए परियोजना वैज्ञानिक डॉ. हफीजुल्लाह को नियुक्त किया गया है। उनके साथ अभिषेक गोंड भी इस कार्य में शामिल होंगे। दोनों वैज्ञानिक निर्धारित अवधि में बांदा जनपद में रहकर कार्य करेंगे। खनन अधिकारी को भी सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र ने उन्हें वैज्ञानिकों की सहायता करने को कहा है।
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