बांदा। फरवरी के आखिर में ही बुंदेलखंड के लोग अप्रैल जैसी तपिश झेल रहे हैं। अधिकतम पारा 33 डिग्री पार कर गया है, जो अप्रैल में होना चाहिए। रात में न्यूनतम पारा भी 17 डिग्री पर रहकर ठंड काफूर किए है। समय से पहले तपिश के ये तेवर खेती-किसानी के लिए ठीक नहीं बताए जा रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बुंदेलखंड को पूरबी हवाएं तपा रही हैं। सबसे गर्म प्रदेश राजस्थान की राजधानी जयपुर का तापमान बांदा से कम है।
जलवायु परिवर्तन से मौसम भी अपने ढर्रे पर नहीं रहा। ठंड वाले माह में भी सर्दी का अहसास नहीं रहा। फरवरी की शुरुआत में गिने-चुने दिन ठंड महसूस हुई, लेकिन हवाओं का रुख बदला तो बुंदेलखंड तपने लगा। फरवरी के आखिरी दिनों में ठंड ने विदाई ले ली है। घरों में पंखे चलने लगे। लोगों की जुबां पर है कि ये कैसा मौसम आया। फरवरी में अप्रैल-मई की गर्मी लाया। फरवरी के आखिरी दो दिन सबसे ज्यादा तपे। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में पारा 33 डिग्री पार कर गया है। गर्म हवाएं शुरू हो गई हैं। न्यूनतम पारा भी 17 डिग्री से कम नहीं हो रहा। फरवरी के आखिरी दिन का अधिकतम पारा सामान्य तौर पर 30 डिग्री और न्यूनतम 15 डिग्री होना चाहिए। आलम यह है कि बुधवार को राजस्थान के जयपुर का अधिकतम पारा 32 डिग्री रहा जो चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों से कम रहा।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में मौसम विभाग के प्राध्यापक डॉ. दिनेश साहा का कहना है कि मौसम में अचानक गर्मी बढ़ने के पीछे दक्षिण पूरब से चल रही गर्म हवाएं हैं। इन हवाओं ने अधिकतम और न्यूनतम तापमान को बढ़ा दिया है। तपिश में और वृद्धि होने के आसार हैं। सामान्य तौर पर फरवरी की अंतिम तारीख को अधिकतम पारा 30 और न्यूनतम 15 डिग्री होना चाहिए, लेकिन यह तीन डिग्री ज्यादा है। डॉ. साहा के मुताबिक जो फसलें समय से बोई गई हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं है। अलबत्ता देर से बोई गई फसलें प्रभावित हो सकती हैं। उनका दाना पतला हो जाएगा।